नई दिल्ली। मोदी सरकार अपनी लोकप्रिय प्रधानमंत्री जन औषधि योजना के तहत जन औषधि केंद्र का विस्तार करके इसे ग्रामीण इलाकों तक ले जाना चाहती है। ऐसे में लोगों के पास अपने घर के पास जन औषधि केंद्र खोल कर कमाई करने का मौका है। केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने इस संबंध को लेकर सभी सांसदों से कहा है कि वे अपने संसदीय क्षेत्रों में ब्लॉक स्तर पर जन औषधि केंद्र खुलवाएं। जन औषधि केंद्र को खोलना काफी आसान है और इसके लिए कभी भी आवेदन किया जा सकता है।
ये है जन औषधि केंद्र के लिए आवेदन करने का तरीका
जन औषधि केंद्र खोलने के लिए https://janaushadhi.gov.in/ से फार्म को डाउनलोड किया जा सकता है। इस फार्म को डाउनलोड करने के बाद भरकर ब्यूरो ऑफ फॉर्मा पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग ऑफ इंडिया के महा प्रबंधक (जीएम) को भेजना होता है। ब्यूरो ऑफ फॉर्मा पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग ऑफ इंडिया की वेबसाइट पर जन औषधि केन्द्र के बारे में पूरी जानकारी दी गई है। इसे देखकर भी आवेदन और अन्य प्रक्रिया को जाना जा सकता है।
जन औषधि केंद्र खोलने के लिए कई सरकार लाइसेंस देती है। यह लाइसेंस कई कैटेगरी में दिए जाते हैं।
-पहली कैटेगरी में कोई भी व्यक्ति, बेरोजगार फार्मासिस्ट, डॉक्टर, रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर जन औषधि केंद्र खोल सकता हैं
-दूसरी कैटेगरी के तहत ट्रस्ट, एनजीओ, निजी अस्पताल, सोसायटी और सेल्फ हेल्प ग्रुप को जन औषधि केंद्र खोल सकते हैं
-तीसरी कैटेगरी में राज्य सरकारों की ओर से नामित एजेंसियों को प्राथमिकता दी जाती है
-सबसे पहले आपके पास रिटेल ड्रग सेल्स का लाइसेंस जन औषधि केंद्र के नाम से होना चाहिए
-इसके अलावा 120 वर्ग फुट की दुकान होना चाहिए
-आवेदक के पास आधार कार्ड और पैन कार्ड होन चाहिए
-संस्थान, एनजीओ, हॉस्पिटल, चैरिटेबल संस्था के पास भी आधार कार्ड, पैन कार्ड, पंजीयन प्रमाण पत्र होना चाहिए
प्रधानमंत्री जन औषधि योजना के खुलने वाले जन औषधि केंद्र से हर माह जितनी दवाओं की बिक्री होती है, उसका 20 फीसदी कमिशन के रूप में दिया जाता है। इसके अलावा हर माह दवाओं की बिक्री का 15 फीसदी प्रोत्साहन के रूप में दिया जाता है। इस प्रकार हर माह जितना ज्यादा दवाओं की बिक्री होगी, उतना ही ज्यादा कमाई का मौका रहेगा।
मोदी सरकार जन औषधि केन्द्र खोलने पर लोगों को आर्थिक मदद भी देती है। यह मदद 2.5 लाख रुपये तक की होती है। इन सेंटर को खालने में आने वाली लागत का 2.5 लाख रुपये का निवेश सरकार प्रोत्साहन राशि के रूप में वापस कर देती है। यह पैसा हर माह 15 फीसदी इंसेंटिव के रूप में दिया जाता है। लेकिन इस इंसेंटिव की अधिकतम सीमा 10 हजार रुपये प्रति माह होती है। यह इंसेंटिव तब तक मिलता है, जब तक 2.5 लाख रुपये पूरे न हो जाएं। अगर किसी ने नक्सल प्रभावित या नॉर्थ ईस्ट के राज्यों में जन औषधि केन्द्र केन्द्र खोला है तो उसे इंसेंटिव के रूप में अधिकतम 15 हजार रुपये महीने तक मिल सकते हैं। लेकिन यह प्रोत्साहन राशि दवाओं की बिक्री की बिक्री के बदले ही मिलेगा। ऐसे में अगर अधिकतम 10 हजार रुपये का फायदा लेना है तो हर माह 1 लाख रुपयों की दवाओं की बिक्री जरूरी है। इसके अलावा कमजोर तबके के लोगों को सरकार 50 हजार रुपये की दवा शुरुआत में अपनी तरफ से देती है, जिसका पैसा वह इसे बेच कर चुका सकते हैं।
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