नई दिल्ली। देश में चुनाव परिणाम (Election result) से बढ़कर कुछ भी नहीं होता है। इस बार भी काउंटिंग वाले दिन यानी आज 23 मई को शेयर बाजार में यह दिख सकता है। शेयर बाजार में एग्जिट पोल (Exit poll) के बाद बने तेजी के रुझान पर आज काउंटिंग वाले दिन कुछ भी हो सकता है। शेयर बाजार आज काफी तेजी दिखा सकता है तो भारी भरकम गिरावक की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता है। आज काउंटिंग में रुझान दिनभर शेयर बाजार की चाल तय करेंगे। ऐसे में चुनाव परिणाम एग्जिट पोल (Exit poll) के अनुरूप से भी अच्छे आए तो शेयर बाजार में अपर सर्किट (Upper Circuit) भी लगा सकता है। लेकिन अगर यह शेयर बाजार (share market) की उम्मीदों से विपरीत आए तो शेयर बाजार में लोअर सर्किट (Lower Circuit) भी लगा सकता है। ऐसे में आज ही यह जान लेना बेहतर है कि शेयर बाजार में अपर सर्किट और लोअर सर्किट होता क्या है। इसके अलावा शेयर बाजार में अपर सर्किट और लोअर सर्किट का इतिहास (History of Upper Circuit and Lower Circuit) क्या है।
गुरुवार के लिए एनएसई के सर्किट ब्रेकर (circuit breakers) का स्तर
अंतिम कारोबारी दिवस यानी 22 मई 2019 को एनएसई का निफ्टी (NIFTY 50) 11737.90 अंक पर बंद हुआ था। ऐसी स्थिति में अगर गुरुवार को निफ्टी (NIFTY 50) 10 फीसदी यानी 1173.80 अंक ऊपर या नीचे जाता है तो पहला सर्किट ब्रेकर (circuit breakers) लग जाएगा। वहीं अगर 15 फीसदी यानी 1760.70 अंक ऊपर या नीचे जाता है तो दूसरी सर्किट ब्रेकर (circuit breakers) लगाया जाएगा। लेकिन अगर निफ्टी (NIFTY 50) 20 फीसदी यानी 2347.60 अंक ऊपर या नीचे होता है तो तीसरे सर्किट ब्रेकर (circuit breakers) के तहत ट्रेडिंग को दिन के बाकी समय के लिए रोक दिया जाएगा। इसलिए यह जानना जरूरी है कि यह तीन तरह के सर्किट ब्रेकर (circuit breakers) होते क्या हैं।
शेयर बाजार में सर्किट ब्रेकर (circuit breakers) दो तरह के होते हैं। एक होता है अपर सर्किट (Upper Circuit) और दूसरा होता है लोअर सर्किट (Lower Circuit)। अपर सर्किट (Upper Circuit) शेयर बाजार (share market) में तब लगता है जब यह एक तय सीमा से ज्यादा बढ़ जाता है। देश में सेबी ने अपर सर्किट (Upper Circuit) के लिए 3 सीमाएं तय की हैं। ये हैं 10 फीसदी, 15 फीसदी और 20 फीसदी की। वहीं जब शेयर बाजार एक तय सीमा से ज्यादा गिरने लगता है तो लोअर सर्किट (Lower Circuit) लगया जाता है। सेबी ने इसके लिए भी 10 फीसदी, 15 फीसदी और 20 फीसदी की सीमा तय की है।
शेयर बाजार के एक सीमा से ज्यादा बढ़ने या गिरने पर सर्किट ब्रेकर (circuit breakers) लगाने की शुरुआत देश में सेबी ने 2001 में की थी। इसका उदृदेश्य शेयर बाजार में भारी उतार चढ़ाव को रोकना होता है।
शेयर बाजार में सर्किट ब्रेकर (circuit breakers) लगाने का भी एक नियम है। एनएसई की बेवसाइट के अनुसार अगर दोपहर 1 बजे के पहले शेयर बाजार 10 फीसदी बढ़े या गिरे तो सर्किट ब्रेकर (circuit breakers) के तहत अपर सर्किट या लोअर सर्किट (Lower Circuit) लगाया जाता है। ऐसी स्थिति में ट्रेडिंग को 45 के लिए रोका जाता है। लेकिन अगर 1 बजे के बाद 10 फीसदी उतर चढ़ाव दर्ज किया जाता है तो कारोबार को केवल 15 मिनट के लिए ही रोका जाता है। इसी प्रकार 15 और 20 फीसदी के लिए भी नियम हैं। सर्किट ब्रेकर (circuit breakers) के बारे में और जानकारी के लिए एनएसई की वेबसाइट पर https://www.nseindia.com/products/content/equities/equities/circuit_breakers.htm जाकर जानकारी ली जा सकती है।
-भारत में सेबी ने 28 जून 2001 में सर्किट ब्रेकर (circuit breakers) की व्यवस्था लागू की
-देश के शेयर बाजार के इतिहास में पहली बार सर्किट ब्रेकर (circuit breakers) का इस्तेमाल 17 मई 2004 को हुआ। इस दिन दो बार सर्किट ब्रेकर (circuit breakers) लगाया गया।
-इसके बाद सर्किट ब्रेकर (circuit breakers) का इस्तेमाल 22 मई 2006 को हुआ। इस दिन शेयर बाजार में लोअर सर्किट (Lower circuit in the stock market) लगाया गया।
-इसके बाद सर्किट ब्रेकर (circuit breakers) का इस्तेमाल 17 अक्टूबर 2007 को किया गया। इस दिन भी शेयर बाजार में लोअर सर्किट (Lower circuit in the stock market) लगा।
-इसके बाद 22 जनवरी 2008 को शेयर बाजार में सर्किट ब्रेकर (circuit breakers) का इस्तेमाल हुआ।
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