नई द‍िल्‍ली: अपने बच्चे की शिक्षा की जरूरत को लेकर मां-बाप को समय से पहले सोचना कर शुरू कर देना चाहिए। माता-पिता अपने बच्चों की अच्छी पढ़ाई में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते हैं। यही वजह है कि उनकी फाइनेंशियल प्लानिंग में अक्सर बच्चों की उच्च शिक्षा पर खास जोर रहता है। लेकिन, इस लक्ष्य के लिए बचत करते हुए कुछ लोग एक ही जैसी गलतियां दोहराते हैं। इन गलतियों से बचकर आप बच्चे का सुनहरा भविष्य बना सकते हैं।

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अकाउंट में बचत करने से बचे

बैंक अकाउंट में बचत करने का खास फायदा नहीं होता है। बैंक के फिक्स्ड डिपॉजिट से मिलने वाला रिटर्न अमूमन महंगाई को मात नहीं दे पाता है। इस तरह लंबे समय में इसका मूल्य घट जाता है। आप उम्मीद से कहीं कम रकम जोड़ पाते हैं। आप कॉलेज की जितनी फीस सोचकर बचत शुरू करते हैं, वह कहीं ज्यादा हो चुकी होती है। इस स्थिति से तभी निकला जा सकता है अगर आपकी सेविंग्स बहुत ज्यादा हैं।

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अभिभावकों को स्वतंत्र फैसला लेने से बचना होगा

बच्चे की उच्च शिक्षा के लिए बचत और निवेश शुरू करने से पहले हर माता-पिता या अभिभावक का यह मुख्य उद्देश्य होना चाहिए कि वह स्वतंत्र निर्णय लेने से बचे। उदाहरण के लिए, यदि माता-पिता यह मानते हैं कि वे अपने बच्चे को एक डॉक्टर के रूप में देखना चाहते हैं और बच्चे की सहमति के बिना ही उसको डॉक्टर बनाने के लिए भारी निवेश करना शुरू करते हैं तो यह गलत है।
क्योंकि इससे बच्चे के ऊपर ज्यादा बोझ आएगा क्योंकि हो सकता है कि आपका बच्चा कुछ और करना चाह रहा हो, किसी और फील्ड में करियर बनाना चाह रहा हो और आप उससे कुछ और कराना चाहते हों।

डे टुडे लाइव को सोच कर प्‍लानिंग करें

लंबी अवधि के लक्ष्यों की प्लानिंग करते हुए ज्यादातर म्यूचुअल फंड निवेशक कोई राउंड फिगर ले लेते है। हमें अक्सर सवाल मिलते हैं जिनमें निवेशक 1 करोड़ रुपये बनाने की तरकीब के बारे में पूछते हैं। फिर चाहे वह बच्चे की शिक्षा हो या रिटायरमेंट की प्लानिंग। सच तो यह है कि हर गुजरते दिन के साथ पैसे का मूल्य घटता है। एक करोड़ की जो रकम आज आपको ठीक दिख रही है, शायद 15 साल बाद वह कम महसूस हो।

अच्छा है कि इसके लिए कॉलेज या कोर्स के मौजूदा खर्च का पता लगाया जाए। फिर हर साल महंगाई की दर को जोड़कर इसे बढ़ाया जाए। तभी आपको यह पता लग पाएगा कि वास्तव में आपको आज से 15 या 20 साल बाद कितने पैसों की जरूरत होगी। इस रकम का पता लग जाने पर आप हर महीने उसी के अनुसार बचत शुरू कर सकते हैं। जो कि वाकई आपके ल‍िए बहुत ही फायदेमंद होगा।

ज्यादा जोखिम लेने से बचे

इस बात पर भी गौर करें कि लोगों कि इस मानसि‍कता को बदलने क‍ि जरुर हैं कि 'मैं 25 साल का हूं, इसलिए मैं स्मॉलकैप फंडों में निवेश करना चाहता हूं। यह सही नहीं है। म्यूचुअल फंड स्कीमों का चुनाव केवल निवेश की अवधि और जोखिम प्रोफाइल को ध्यान में रखकर करना चाहिए। इसका मतलब यह है कि अगर आप कंजर्वेटिव इंवेस्टर हैं यानी निवेश के साथ बहुत जोखिम नहीं ले सकते हैं और 10 साल की अवधि को ध्यान में रखकर निवेश कर रहे हैं तो आपको लार्जकैप स्कीमों में पैसा लगाना चाहिए। यदि निवेश की अवधि 20 साल है तो भी कंजर्वेटिव इंवेस्टर को स्मॉलकैप स्कीमें नहीं चुननी चाहिए। ऐसा इसलिए है क्‍योंकि बाजार में गिरावट के वक्त अक्सर निवेशक परेशान होने लगते हैं। हड़बड़ाहट में वे निवेश को रोक देते हैं। जिस कारण बाद में उन्‍हें अफसोस भी होता है।

कैलकुलेटेड रिस्क लें, ताक‍ि अनुभव हो

इस बात का भी ध्‍यान दें कि थोड़ा जोखि‍म उठाने से कुछ नहीं होगा। कुछ निवेशक किसी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहते हैं। इसका जोखिम लेने की क्षमता से कोई लेनादेना नहीं होता है। बता दें कि एडवाइजर कहते हैं कि यह सिर्फ मानसिकता है जो अड़चन पैदा करती है। यह मानसिकता तभी सही है अगर लोग हर महीने बड़ी बचत कर लेते हैं। लेकिन, तमाम तरह के बिलों के भुगतान के बाद बड़ी बचत करना आसान नहीं है। इसलिए आपको जोखिम के प्रति अपने नजरिये का दोबारा आकलन करने की जरूरत है। वैसे, इसका यह कतई मतलब नहीं है कि अनावश्यक जोखिम लिया जाए। कैलकुलेटेड रिस्क लें, ताकि आपके पास अपने लक्ष्यों के लिए पर्याप्त धन हो।