नई दिल्ली। देश में कैंसर (Cancer) महामारी की तरह फैल रहा है। इसके चलते भारत ने अपना महान नेता मनोहर पर्रिकर (Manohar Parrikar) खो दिया है। हालांकि उनको इलाज के लिए दुनिया की सारी बेहतरीन सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं थीं। कैंसर (Cancer) का इलाज इतना महंगा है कि आमलोग कराते-कराते कंगाल हो जाते हैं। लेकिन शायद कम ही लोगों को पता होगा कि कैंसर के इलाज के लिए एलआईसी (LIC) एक विशेष बीमा योजना चलाती है, जिसका प्रीमियम करीब 300 रुपये महीने ही आता है। मनोहर पर्रिकर के पहले देश में कई चर्चित लोगों में कैंसर की जानकारी मिली है, जो आजकल इलाज करा रहे हैं। इनमें सोनाली बेंद्रे, आयुष्मान खुराना (Ayushmann khurrana) की पत्नि ताहिरा कश्यप ( Tahira kashyap), ऋषि कपूर और नफीसा अली जैसे लोग शामिल हैं।
भारत में हर साल 10 लोगों
भारत में हर साल कैंसर (Cancer) के 10 लाख नए मरीज सामने आते हैं। यह बीमारी इतनी गंभीर है कि इसकी वजह से इन 10 लाख में से करीब 7 लाख मरीजों की मौत हो जाती है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) की मानें तो 2020 तक मरीजों की संख्या करीब 18 लाख हो जाएगी और मौतों की संख्या 8 लाख के पार निकल सकती है।
कैंसर (Cancer) जैसी बीमारी का इलाज--कराते-कराते लोग कंगाल हो जाते हैं। ऐसे में जरूरी है कि लोगों के पास कैंसर (Cancer) और ऐसी ही अन्य गंभीर बीमारी के इलाज के लिए स्वास्थ बीमा (health insurance) की सुविधा हो। यह स्वास्थ बीमा (health insurance) काफी सस्ते होते हैं, लेकिन जागरूकता के अभाव में लोग इनको नहीं लेते हैं। लेकिन अगर बाद में उनको या उनके परिवार में किसी को यह बीमारी हो जाए तो इलाज कराते-कराते कंगाली की स्थिति आ जाती है। ज्यादातर स्वास्थ बीमा (health insurance) देने वाली कंपनियां कैसर गंभीर बीमारियों के इलाज का कवर देती हैं। ऐसी ही एक पॉलिसी एलआईसी की एलआईसी कैंसर कवर पॉलिसी (LIC Cancer Cover Policy) है, जिसमें करीब 300 रुपये महीने पर लाखों का रुपये का बीमा कवर मिल जाता है।
कैंसर (Cancer) की प्रमुख जांच में मैमोग्राफी और पैप स्मियर शामिल होती हैं। मैमोग्राफी में स्तन के तंतु की एक्सरे के जरिए जांच की जाती है। पैप स्मियर जांच को पैपेनिकोला भी कहते हैं। गर्भाशय या सेरविक्स टिशू ले कर इस जांच को किया जाता है। इस के अलावा कैंसर (Cancer) की जांच के लिए शरीर के प्रभावित हिस्से का एक्सरे किया जाता है।
कैंसर (Cancer) की जांच से तय होता है इलाज का तरीका
कैंसर (Cancer) का रोग जिस स्थान पर हुआ वह इस बात का मुख्य कारक होता है कि इलाज कैसे होगा? इस के साथ ही साथ मरीज की हालत कैसी है, यह भी महत्त्वपूर्ण होता है। इस के इलाज में रेडियम किरणों का प्रयोग किया जाता है। ये किरणें शरीर के कैंसर (Cancer) कोष को खत्म करने का काम करती हैं। कैंसर (Cancer) के इलाज में रेडियम का प्रयोग काफी सावधानी से किया जाता है। कैंसर (Cancer) की शुरुआती अवस्था में सर्जरी सब से प्रभावशाली होती है। तब तक कैंसर (Cancer) शरीर में फैला नहीं होता है।
एलआईसी (LIC) ने एलआईसी कैंसर कवर पॉलिसी (LIC Cancer Cover Policy) पेश की है। इस पॉलिसी की खास बात आपको बड़ी बीमारियों से सुरक्षा देना है। एलआईसी की साइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक, आप एलआईसी कैंसर कवर पॉलिसी (LIC Cancer Cover Policy) में महीने में 300 रुपये से थाेड़ा कम यानी साल भर में 3,380 रुपये देकर कैंसर (Cancer) जैसी जानलेवा बीमारी का कवर ले सकते हैं।
एलआईसी कैंसर कवर पॉलिसी (LIC Cancer Cover Policy) का डिटेल
-उम्र - 30 वर्ष
-अवधि - 30 वर्ष
-सम एस्योर्ड - 20 लाख रुपये
-वार्षिक प्रीमियम - 3,380 रुपये
(पूरी जानकारी एलआईसी (LIC) की बेवसाइट पर जाकर ली जा सकती है, या किसी एलआईसी (LIC) एजेंट से या एलआईसी (LIC) कार्यालय में जाकर अधिकारियों से ली जा सकती है। )
एलआईसी कैंसर कवर पॉलिसी (LIC Cancer Cover Policy) के अन्य डिटेल
-इस पॉलिसी को लेने की न्यूनतम उम्र (Minimum Age) है 20 वर्ष
-इस पॉलिसी को लेने की (Maximum Age) है 65 वर्ष
-न्यूनतम बीमा कवर (Minimum Basic Sum Insured) है 10 लाख रुपये
-अधिकतम बेसिक बीमा कवर (Maximum Basic Sum Insured) है 50 लाख रुपये
-न्यूनतम पॉलिसी अवधि (Minimum Policy Term) है 10 वर्ष
-अधिकतम पॉलिसी अवधि (Maximum Policy Term) है 30 वर्ष
More Articles
- Nifty 25,000 की ओर या आएगा Correction? Banking, NBFC और IT Sector पर Expert की बड़ी राय
- भारी बारिश का अलर्ट: बाढ़ में डूबी कार को स्टार्ट न करें, क्लेम पाने का सही तरीका जानें
- Manipal Health IPO: ₹9,275 करोड़ का बड़ा दांव, क्या आपको अप्लाई करना चाहिए?
- ITR फाइल करने का आज आखिरी मौका: क्या आज के बाद लगेगा जुर्माना? जानें बचने का तरीका
- US Fed का फैसला आज रात: क्या भारतीय बाजार में आएगी बड़ी हलचल? जानें ट्रेडर्स के लिए खास रणनीति
- GST QRMP स्कीम: PMT-06 पेमेंट में 35% चालान चुनें या सेल्फ-असेसमेंट? ब्याज से बचने का पूरा गणित