मैं भारत से यूएसए के स्टॉक बाजार में निवेश करना चाहता हूँ क्या ये मुमकिन है? यदि हाँ तो कैसे? यह सवाल कई बार पूछे जाते हैं इस लेख में में हम इस सवाल का जबाव देने की कोशिश करेंगे। यूएसए (USA) स्टॉक बाजार में निवेश की प्रक्रिया और ट्रेडिंग को समझने से पहले यह जानना जरुरी है कि क्या कारण है कि भारतीय निवेशक यूएसए या अन्य बाज़ारों में निवेश करने में रूचि लेते हैं।
यूएसए या अन्य स्टॉक बाज़ारों में लोग क्यों निवेश करते हैं?
यूएसए या अन्य स्टॉक बाज़ारों में निवेश करने के कई कारण है उनमें से कुछ निम्न हैं-
एक कारण है डाइवर्सिफिकेशन (विविधता), आप विदेशी बाज़ारों में निवेश करके अपने पोर्टफोलियो को डाइवर्सिफाइड कर सकते हैं। डाइवर्सिफिकेशन, स्टॉक से जुडी जोखिमों को कम करने में सहायक हैं। इसे एक उदहारण से समझें- मान लीजिए भारतीय स्टॉक बाजार कुछ घरेलु कारणों की वजह से नीचे चल रहा है और आप पैसा नहीं कमा पा रहे हैं यदि आपने विदेशी स्टॉक बाज़ारों में निवेश कर रखा है तो आप अपनी रिस्क को कम कर सकते हैं क्योकि भारतीय बाजार की परिस्थितियां अंतर्राष्ट्रीय बाजार को प्रभावित नहीं करती हैं ज्यादातर निवेशक विदेशी बाज़ारों में अच्छी संभावनाओं के लिए निवेश करते हैं वे सोचते हैं कि वैश्विक कम्पनियाँ संसाधन, मापदंड और सरकारी सहयोग के मामले में अच्छी होती हैं।
एक अन्य कारण है कि लोग अपनी पसंद की कंपनियों में ही निवेश करना पसंद करते है जैसे एप्पल, गूगल, फेसबुक, टवीटर, अमेज़न इत्यादि। ये कम्पनियाँ वैश्निक होती हैं और यह अच्छा कार्य करती हैं जिससे ज्यादा पैसे कमाने की सम्भावना होती है।
आपको विदेशी स्टॉक बाज़ारों विशेषकर यूएसए में अच्छे अवसर प्राप्त होते हैं एक बार आप बाहर निवेश करना शुरू करते है, तो कोई अवरोध शेष नहीं रहता हैं यह प्रॉफिट को बढ़ाने की सम्भावना को बढ़ा देती है। विदेशी स्टॉक बाजार में निवेश करने के दो तरीके हैं।
1. भारतीय ब्रोकर के साथ ट्रेडिंग अकाउंट अकाउंट खोलें
यहाँ कुछ भारतीय ब्रोकर है जैसे आईसीआईसीआई डायरेक्ट, कोटक सिक्योरिटीज, इंडिया इंफोलाइन, रिलायंस मनी और रेलिगेयर। इनका विदेशी ब्रोकर्स के साथ समझौता होता है ये विदेशी ब्रोकर्स आपके लिए विदेशी बाजार में ट्रेड करते हैं। इसके लिए निम्न प्रक्रिया की पालन करना होगा-
ब्रोकरेज हाउस के साथ ट्रेडिंग अकाउंट खोलें यह ओवरसीज ट्रेडिंग अकाउंट भी कहलाते हैं केवाईसी दस्तावेज जमा कराएं जिसमे पैन कार्ड और निवास का प्रमाण जैसे वोटर आईडी कार्ड या नवीनतम बैंक स्टेटमेंट शामिल होता है।
एक बार आपका अकाउंट खुल जायेगा तो आपको उसमे फंड डालना होगा। रेमिटेंस नियमों के अनुसार, एक भारतीय नागरिक केवल 250000 डॉलर तक की राशि ही रेमिट कर सकता है। विदेशी करेंसी में फंड प्राप्त करने के लिए आपको फॉर्म ए 2 जमा करवाना होगा। फॉर्म ए 2 विदेशी एक्सचेंज में आहरण करने एवं फेमा में घोषणा के लिए उपयोग किया जाता है।
यह फॉर्म आपके ब्रोकरेज हाउस के पास मिल जायेगा
एक बार फंड ट्रांसफर हो जाने पर आप ऑनलाइन प्लेटफार्म पर ट्रेडिंग कर सकते हो यदि आप एक स्टॉक को खरीदते हो तो यह टी+2 दिन में आपके डीमेट अकाउंट में आ जायेगा। इस अवधि में यह आपके विदेशी ब्रोकर्स के पूल में रहेगा।
याद रहें कि विदेशी ब्रोकर के साथ आप मार्जिन ट्रेंडिंग और शार्ट सेलिंग नहीं कर सकते हैं यदि आपके पास पर्याप्त फंड है तभी आप शेयर खरीद सकते हैं आपको अपने इनबॉक्स में प्रत्येक एक्जीक्यूटेड ट्रेड के लिए एक कॉन्ट्रैक्ट नोट प्राप्त होगा।
यूएसए बाजार में निवेश इस दूसरे तरीके में आपको विदेशी ब्रोकर्स के माध्यम से प्रवेश करना होगा। ऐसे विदेशी ब्रोकर्स जो भारतीय नागरिकों को विनियोग करने की अनुमति देते हैं वो इंटरैक्टिव ब्रोकर्स कहलाते हैं टीडी अमेरिट्रेड, चार्ल्स स्च्वाब इंटरनेशनल अकाउंट इत्यादि। सभी विदेशी ब्रोकर्स के माध्यम से निवेश करने की प्रक्रिया लगभग समान है हालाँकि ब्रोकर शुल्क अलग-अलग हो सकते हैं।
एक भारतीय नागरिक एक वित्तीय वर्ष में भारत के बाहर कुल मिला कर $250000 तक ही निवेश कर सकता है। यह सीमा लिबरलाइज़्ड रेमिटेंस सिस्टम (एल आर एस) के अनुसार है। अतः प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष अधिकतम विनियोग सीमा राशि $250000 यानि लगभग 1.7 करोड़ रुपये है।
जब भी आप विदेशी बाजार में विनियोग करेंगे तो आपको उच्च कंवर्सशन और ब्रोकरेज शुल्क चुकाने होंगे। ब्रोकरेज सामान्यतया यूएस डॉलर में चुकाने होते हैं। जब आप यूएस बाजार में निवेश करते है तो एक्सचेंज रेट एक बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है डॉलर की रेट में होने वाले किसी भी उच्चावचन का सीधा-सीधा प्रभाव प्रॉफिट पर पड़ता है।
जब आप विदेशी स्टॉक्स में निवेश करते हैं तो आपको ज्यादा सतर्क रहने की जरुरत होती है। ऐसा हो सकता है कि आपको उन वैश्विक मसलों और आर्थिक परिस्थितियों की जानकारी ना हो जो प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से विदेशी कंपनियों और स्टॉक्स की कार्यक्षमता को प्रभावित करती हो।
आप भारत से यूएस बाजार में निवेश कर सकते हैं और वैश्विक अर्थव्यवस्था का हिस्सा बन सकते हैं हालाँकि, भारत विश्व की तेजी से उभरती हुई अर्थव्यवस्था है। जबकि अन्य सभी इंटरनेशनल बाजार तर-बतर है। विदेशी बाजार में निवेश आपको अच्छी संभावनाओं और डाइवर्सिफिकेशन के लिए वैश्विक कंपनियों में निवेश करने का एक बड़ा अवसर प्रदान कर सकता है लेकिन यह विदेशी एक्सचेंज की अतिरिक्त लागत, अधिक ओनरशिप लागत और वैश्विक जोखिम की अनिश्चितता के साथ प्राप्त होगा।
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