बच्चों के बैंक अकाउंट खोलना आजकल बड़ा ही आसान है। जब बच्चे बड़े हो जाएं तो अपने बच्चों के नाम पर बचत और निवेश शुरु करना हमेशा बेहतर होता है। आप नियमित आधार पर एक छोटी राशि की बचत के साथ शुरुआत कर सकते हैं। कोई भी निवेश करने के लिए अनुशासित बचत की आदत बहुत आवश्यक है।
यदि बचत करना मुश्किल है, तो नाबालिग के नाम पर एक अलग खाता शुरु कर सकते हैं और एक आवर्ती डिपॉजिट शुरु कर सकते हैं। जिससे पैसे की बचत करने में मदद मिलेगी और इसका इस्तेमाल भविष्य शुल्क भुगतान या कोई भी निवेश करने के लिए किया जा सकता है।
यहां पर आपको बताएंगे कि कैसे बच्चों के लिए बैंक में खाता खोला जा सकता है-
बैंकों को इस तरह के नाबालिगों के खातों जैसे बचत डिपॉजिट खातों को खोलने के लिए अनुमति दी जाती है जिसमें संरक्षक के रूप में माता होती है। चूंकि अभिभावक को अधिक राशि निकालने की अनुमति नहीं होती है इसलिए ये हमेशा क्रेडिट में रहते हैं। ताकि खाते में राशि बनी रहे और अनावश्यक चीजों के लिए उपयोग न हो।
10 वर्ष की आयु से ऊपर नाबालिग अपनी इच्छा से बैंक खाते को खोल तथा संचालित कर सकते हैं। जबकि बैंक के पास जोखिम प्रबंधन प्रणालियों पर नज़र रखने के लिए उम्र और राशि के मामले में सीमा तय करने के लिए सभी अधिकार हैं।
आप इंटरनेट बैंकिंग, डेबिट कार्ड, चैक बुक सुविधा जैसी अतिरिक्त बैंकिंग सुविधाओं का लाभ उठा सकते हैं। नाबालिग के नाम पर अभिभावाक को चैक बुक जारी की जाएगी
रियल पैरेंट्स के द्वारा होना चाहिए संचालित होना चाहिए खाता
बालिग होने पर नाबालिग को खाते में शेष राशि की पुष्टि करनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि खाता प्राकृतिक अभिभावाक द्वारा ही संचालित किया गया है।
हस्ताक्षर का नवीन नमूना और अन्य निर्देश प्राप्त करने चाहिए और सभी कार्य करने के लिए इन्हें रिकार्ड में रखना चाहिए।
बैंक खाता का महत्व बच्चों को बताएं
ऐसे खाते अपने बच्चे को पैसे का महत्व समझाने और खर्च करने की आदत को नियंत्रण करने के लिए खोले जा सकते हैं।
1-जन्म प्रमाण तिथि
2-जन्म पंजीकरण प्रमाण पत्र
3-जन्म तिथि दर्शाता हुआ रिपोर्ट कार्ड
4-फोटो और जन्मतिथि का उल्लेख करता हुआ स्कूल आईडी कार्ड
- अभिभावाक द्वारा हस्ताक्षर किया जाने वाला नाबालिग का घोषणापत्र
- अभिभावाक का फोटो
- खाता खोलने के फार्म पर हस्ताक्षर
- यदि वह प्राकृतिक अभिभावक नहीं है तो उसे अदालत द्वारा नियुक्त किया जाना चाहिए
नाबालिग खाते से अर्जित ब्याज आय को अभिभावक की आय के साथ जोड़ा जाएगा और आयकर स्लैब के अनुसार उस पर टैक्स लगाया जाएगा।
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