GDP को सामान्यत: किसी देश की अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन का आंकलन करने हेतु उपयोग किया जाता है। यह संख्या किसी देश में एक निश्चित अवधि में उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं के मौद्रिक मूल्य को दर्शाती है।

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जीडीपी क्यों महत्वपूर्ण है?

जीडीपी से देश के नागरिक, अर्थशास्त्री, राजनेता, निवेशक और व्यवसाय भी प्रभावित होते हैं। यह सरकार के लिए एक मात्रात्मक संकेतक है जो बताता है की यदि देश की अर्थव्यवस्था सही तरीके से विकास नहीं कर रही है तो क्या उसे व्यवस्थित करने के लिए और पूंजी लगाने की आवश्यकता है या नहीं।

एक व्यवसायी जीडीपी का उपयोग यह जानने के लिए करता है कि वह अपने उत्पादन की सीमा को बढ़ाये या नहीं। एक निवेशक भी निवेश सम्बन्धी निर्णय लेने के लिए जीडीपी का उपयोग करता है। GDP क्‍या है इसके बारे में संपूर्ण जानकारी

 

भारतीय जीडीपी के लिए डाटा कलेक्‍शन

भारतीय जीडीपी की गणना केंद्रीय सांख्यिकी संगठन के द्वारा की जाती है। यह संगठन सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय के अधीन क्रियाशील है यह आंकड़ों का संग्रहण करता है और सांख्यिकी रिकॉर्ड का अनुरक्षण करता है।

इसके विभिन्न कार्यकर्मों के बीच, यह GDP की गणना के लिए विभिन्न औधोगिक सूचकांक जैसे औधोगिक उत्पादन सूचकांक (IIP), उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI), थोकमूल्य सूचकांक (WPI) के लिए निरंतर रूप से निश्चित समयावधियों पर सर्वेक्षणों का आयोजन करता है।

यह विभिन्न सरकारी विभागों एवं एजेंसियों के बीच आंकड़ों के संग्रहण हेतु समन्वय बनाने का भी कार्य करता है। उदहारण के लिए, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधीन औधोगिक नीति एवं संवर्धन विभाग औधोगिक उत्पादन सूचकांक (आई आई पी) के लिए आंकड़े उपलब्ध करवाता है।

 

भारतीय GDP की गणना के तरीके

भारतीय जीडीपी की गणना के लिए मुख्य रूप से चार तरीके है-

  • आर्थिक गतिविधियों पर आधारित कारक लागत पर 
  • व्यय पर आधारित बाजार मूल्य पर 
  • चालू बाजार मूल्य पर आधारित सामान्य जीडीपी 
  • मुद्रास्फीति समायोजित वास्तविक जीडीपी
  • सभी चारों तरीकों को जारी किया जाता है लेकिन कारक लागत मीडिया द्वारा रिपोर्ट की जाने वाली एक संख्या है।

     

    सेक्टर (वर्ग समूह)

    जीडीपी की गणना देश के विभिन्न सेक्टरों में एक निश्चित समयावधि में होने वाले शुद्ध परिवर्तन पर आधारित होती है। अतः यदि परिणाम +7% दर्शाते हैं, तो इसका अर्थ है कि सभी सेक्टरों में उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं के कुल मूल्यों में औसतन 7% की बढ़ोतरी हुई है।

    GDP की गणना में शामिल किये जाने वाले 8 सेक्टर निम्न है-
    1. कृषि, वानिकी एवं मतस्यपालन
    2. खनन एवं उत्खनन
    3. विनिर्माण
    4. विधुत, गैस, जल आपूर्ति और अन्य सेवाएं
    5. निर्माण कार्य
    6. व्यापार, होटल, यातायात, सम्प्रेषण एवं ब्रॉडकास्टिंग सम्बन्धी सेवाएं
    7. वित्तीय, रियल एस्टेट एवं पेशेवर सेवाएं
    8. लोक प्रशासन, रक्षा एवं अन्य सेवाएं

     

    समय अवधि

    भारत की GDP त्रेमासिक एवं वार्षिक आधार पर कैलकुलेट की जाती है, लेकिन रिपोर्ट (प्रतिवेदन) दो महीने के अंतराल में प्रदर्शित किया जाता है। उदहारण के लिए दिसंबर माह वाली तिमाही की रिपोर्ट फरवरी माह के अंत में प्रकाशित होगी।