चिकन तो हर कोई खाता है और जो नहीं भी खाता है उसे भी मुर्गे यानी की चिकन के बारे में अच्छे से जानकारी होगी। पर क्या काले चिकन के बारे में जानते हैं शायद ज्यादातर लोग नहीं जानते हैं। जी हां काला मुर्गा आसानी से उपलब्ध नहीं होता है और यह देश के कुछ हिस्सों में ही पाया जाता है। इस काले मुर्गे को कड़कनाथ चिकन के नाम से जाना जाता है। आजकल यह कड़कनाथ चिकन लोगों का बिजनेस करने का एक बहुत ही शानदार जरिया बन चुका है। अगर आपके पास 1000 काले मुर्गे हैं तो आप 10 लाख तक की कमाई बहुत ही कम दिनों में कर सकते हैं।
तो आइए जानते हैं इस मुर्गे का बिजनेस कैसे किया जा सकता है और कड़कनाथ चिकन की क्या खूबियां हैं?
कड़कनाथ चिकन प्रमुख रुप से मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ की ब्रीड है। यह मध्यप्रदेश के झाबुआ जिले का मुर्गा है। लेकिन अब यह मुर्गा देश के कई हिस्सों जैसे कि तमिलनाडू, आंध्रप्रदेश और महाराष्ट्र जैसे कई राज्यों में पाया जाने लगा है। अब इस मुर्गे की डिमांड पूरे देश में होने लगी है।
कड़कनाथ भारत का एकमात्र काले मांस वाला चिकन है। रिसर्च के अनुसान सफेद चिकन के मुकाबले इसमें कोलेस्ट्राल का स्तर कम होता है। तो वहीं अमीनो एसिड का स्तर ज्यादा होता है। इसका स्वाद भी बायलर और देशी मुर्गे से अलग होता है।
आपको बता दें के झाबुआ जिले के आदिवासी कड़कनाथ मुर्गे को कालीमासी के नाम से पुकाराते हैं। इसका मांस, खून, चोंच, अण्डे, जुबान और स्किन सबकुछ काला ही होता है। इसमें प्रोटीन की भरपूर मात्रा पायी जाती है। इसमें फैट बहुत कम होता है इसलिए हृदय और डायबिटीज रोगियों के लिए यह चिकन बहुत ही फायदेमंद माना जाता है।
आपको बता दें कि कड़कनाथ मुर्गे का एक अण्डा जहां 50 रुपए का मिलता है तो वहीं एक मुर्गा आपको 500 रुपए में मिलेगा। तो वहीं एक दिन की चूजे की कीमत आपको 70 रुपए चुकानी होगी। अगर आप फुटकर बाजार से काला मुर्गा खरीदते हैं तो हो सकता है आपको 350 से 450 रुपए तक मिल जाए और अण्डा 25 रुपए तक में मिल सकता है।
अगर आप इस मुर्गे का बिजनेस करना चाहते हैं तो आपको कुछ बातें ध्यान में रखनी होगी। अगर आप 100 चिकन रख रहे हैं तो आपको 150 वर्ग फीट की जगह की जरुरत होगी। तो वहीं अगर आपको 1000 काले मुर्गे रखने हैं तो आपको 1500 वर्ग फीट की जगह की जरुरत होगी। मुर्गे का फॉर्म गांव या शहर से बाहर मेन रोड से दूर हो, पानी या बिजली की पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए। हो सके तो फॉर्म उंचाई पर हो ताकि पानी का जमाव आस-पास न हो।
चूंजों और मुर्गियों को अंधेरे में या रात में खाना नहीं देना चाहिए। मुर्गी के शेड में प्रतिदिन कुछ घंटे प्रकाश की आवश्यकता भी होती है। दो पोल्ट्री फॉर्म एक-दूसरे के करीब न हों। एक शेड में हमेशा एक ही ब्रीड के चूजे रखने चाहिए। पानी पीने के बर्तन दो-तीन दिन में जरुर साफ करें। फॉर्म में हवा और पर्याप्त रोशनी हो।
कड़कनाथ मुर्गे का पोल्ट्री फॉर्म खोलने के लिए आपको इंडिया मार्ट पर मौजूद सेलर्स से कांटेक्ट कर ये मुर्गे प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा इंटरनेट पर भी कई ऐसे पोल्ट्री फॉर्म मिल जाएंगे जो काले मुर्गे के चूजे और अण्डे बेचते हैं। अगर आप बड़े स्तर पर इस मुर्गे का बिजनेस करना चाहते हैं तो आपको ऐसे पोल्ट्री फॉर्म में जा कर जानकारी लेनी चाहिए जो पहले से इनका बिजनेस कर रहे हों।
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