अक्‍सर लोग यह सवाल पूछते हैं कि पीएफ का पैसा कब और कैसे निकाला जाता है। कई बार ऐसा होता है कि इमरजेंसी में लोगों को पैसे की आवश्‍यकता होती है उनके पीएफ अकाउंट में पैसा भी होता है, लेकिन जानकारी न होने के आभाव में वो अपनी PF राशि नहीं निकाल पाते हैं। तो आज यहां पर हम आपको बताएंगे कि कैसे आप पीएफ की राशि निकाल सकते हैं।

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पीएफ से पैसे निकालने की प्रक्रिया बताने से पहले आपको यहां पर बताएंगे कि पीएफ राशि में कर्मचारी और कंपनी का योगदान कितना होता है।

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कर्मचारी और कंपनी का योगदान

कंपनी की ओर से पीएफ अकाउंट में बेसिक सैलरी, डीए और रिटेनिंग अलाउंस का 12 पर्सेंट हिस्‍सा जमा किया जाता है। इतनी ही राशि एंप्‍लायी की सैलरी से भी कटती है। हालांकि जिन संस्‍थानों में कर्मचारियों की संख्‍या 20 से कम है, लेकिन अन्‍य शर्तों को पूरी करते हैं वहां पीएफ में बेसिक सैलरी का 10 पर्सेंट हिस्‍सा ही जमा किया जाता है। प्राइवेट सेक्‍टर के ज्‍यादातर कर्मचारी की बेसिक सैलरी पर ही पीएफ का कैलकुलेशन होता है। उदाहरण के तौर पर यदि किसी कंर्मचारी की बेसिक सैलरी 30,000 है तो उसका पीएफ अमाउंट 3,600 रुपए मासिक होगा।

एंप्‍लॉयर का पूरा हिस्‍सा नहीं जाता पीएफ में

यह जानना जरुरी है कि सभी कर्मचारियों के एंप्‍लॉयर्स का पूरा हिस्‍सा पीएफ में नहीं जाता। यदि एंप्‍लॉयी की बेसिक सैलरी 15,000 रुपए या उससे अधिक है तो 15 रुपए के बेसिक का 8.33 पर्सेट हिस्‍सा एंप्‍लॉयी पेंशन स्‍कीम में चला जाता है। इसका अर्थ यह हुआ कि आपका 1,250 रुपए पेंशन स्‍कीम के लिए जमा होगा, लेकिन बेसिक सैलरी के 15,000 रुपए से कम रहने पर पूरी सैलरी का ही 8.33 पर्सेंट ईपीएफ के लिए जमा होता है। इसके अलावा बाकी बची राशि को पीएफ स्‍कीम में रखा जाता है। रिटायरमेंट पर एंप्‍लॉयी को अपना हिस्‍सा और एंप्‍लॉयर की ओर से जमा किए गए पीएफ की पूरी राशि मिलती है।

वॉलेंटरी प्रॉविडेंट फंड

कोई भी कंर्मचारी वॉलेंटरी तौर पर अपनी बेसिक सैलरी के 12 फीसदी हिस्‍से से भी अधिक की राशि को पीएफ के तौर पर जमा कर सकता है। इसे वॉलेंटरी प्रोविडेंट फंड कहा जाता है। इसकी गिनती अलग से होती है। इसके ब्‍याज पर टैक्‍स भी नहीं लगता है। हालांकि एंप्‍लॉयर के लिए ऐसा कॉट्रिब्‍यूशन करना जरुरी नहीं है।

पीएफ अकाउंट से निकासी

एंप्‍लॉयीज प्रॉविडेंट फंड के ऐक्‍ट के मुताबिक कोई एंप्‍लॉयी पीएफ का फाइनल सेटलमेंट 55 साल से अधिक आयु होने के बाद रिटायरमेंट पर ही हो सकता है। कुल ईपीएफ बैलेंस में इंप्‍लॉयी का हिस्‍सा और नियोक्‍ता के हिस्‍से के अलावा उस पर मिलने वाला ब्‍याज भी शामिल होता है। हालांकि 54 साल से अधिक की आयु होने पर कोई एंप्‍लॉयी ब्‍याज समेत पीएफ का 90 प्रतिशत तक का हिस्‍सा निकाल सकता है। लेकिन, 55 साल से कम आयु पर ही नौकरी छोड़ने वाला एंप्‍लॉयी 60 दिनों तक लगातार बेरोजगार रहने की स्थिति में पीएफ का पूरा बैलेंस निकाल सकता है।

ब्‍याज का कैलकुलेशन

पीएफ खाते पर ब्‍याज की गणना मासिक जमा राशि के आधार पर यानी मंथली रनिंग बैलेंस होता है।

जानिए UAN के बारे में

UAN का अर्थ यूनिवर्सल अकाउंट नंबर है, जो ईपीएफओ की ओर से हर खाताधारक को दिया जाता है। यूएएन नंबर के जरिए अलग-अलग संस्‍थानों में काम करने के बाद भी एंप्‍लॉयीज का एक खाता बना रहता है। इससे अलग-अलग संस्‍थानों में काम करने के बाद खातों को एक सिंगल आईडी से जोड़ने में मदद मिलती है।

5 साल तक लगातार नौकरी करने का लाभ

आमतौर पर अपने शुरुआती या मिड इयर्स में एंप्‍लॉयीज की ओर से नौकरियां बदली जाती हैं। ऐसे में किसी संस्‍थान से नौकरी छोड़ने पर एंप्‍लॉयीज के पास दो विकल्‍प होते हैं या तो वे 60 दिनों तक इंतजार करने के बाद राशि निकाल लें या फिर नए एंप्‍लॉयर के पास अपना बैलेंस ट्रांसफर करवा लें।

पूर्व निकासी पर टैक्‍स

किसी भी नौकरी में 5 साल पूरे किए बिना पीएफ बैलेंस की निकासी पर टैक्‍स लगता है। एंप्‍लॉयर के कुल योगदान और मिलने वाले ब्‍याज पर टैक्‍स लागू होता है। सेक्‍शन 80 सी के तहत एंप्‍लॉयी के हिस्‍से को निकासी के वर्ष में उसकी कमाई मे जोड़ दिया जाता है। इसके अलावा उस पर मिलने वाला ब्‍याज भी टैक्‍स के दायरे में आता है।

एंडवांस में निकाल सकते हैं पीएफ

नौकरी के बाद की जरुरतों के लिहाज से एंप्‍लॉयी को पीएफ खाते की सुविधा दी जाती है। लेकिन, कोई एंप्‍लॉयी नौकरी में रहते हुए भी इसे निकाल सकता है, जिसे लोन बजाय एडवांस कहा जाता है। हालांकि यह निकासी इलाज, मकान, बच्‍चों की फीस, शादी और अन्‍य जरुरी चीजों के लिए ही की जा सकती है।

हाउसिंग स्‍कीम के लिए पीएफ

ईपीएफओ ने हाल ही में इस योजना की शुरुआत की है। इसके तहत कोई भी एंप्‍लॉयी घर की डाउन पेमेंट के लिए पीएफ का 90 पर्सेंट तक का हिस्‍सा निकाल सकता है। इसके अलावा होम लोन की ईएमआई चुकाने के लिए भी इस खाते का इस्‍तेमाल किया जा सकता है।