इस साल म्युचुअल फंड इंडस्ट्री में 8,000 नए डिस्ट्रीब्यूटर्स जोड़े गए हैं। ये नए डिस्ट्रीब्यूटर और पुराने डिस्ट्रीब्यूटर आपको म्युचुअल फंड में निवेश करने के लिए कह सकते हैं। पर आपको अपने पैसों को निवेश करने से पहले आर्थिक सलाह लेना बहुत जरूरी है। इसके लिए आप म्यूचुअल फंड एक्सपर्ट की भी मदद ले सकते हैं।
डिस्ट्रीब्यूटर की शैक्षिक योग्यता जानना बहुत जरूरी है। आपको पता होना चाहिए कि उसे किस प्रकार का ज्ञान और अनुभव है। म्युचुअल फंड सलाहकार को विभिन्न संपत्ति जैसे इक्विटी, फिक्सड इनकम और गोल्ड आदि की जानकारी होनी चाहिए।
उसे और उसकी टीम को ये अच्छी तरह से पता होना चाहिए कि ये संपत्ति किस तरह विभिन्न घरेलू और अंर्तराष्ट्रीय कार्यों को प्रभावित कर सकती है। सलाहकार को पता होना चाहिए कि आपके जीवन की जरूरतों को किस तरह निवेश से कब और कैसे पूरा किया जा सकता है।
सबसे जरूरी बात है कि जिस डिस्ट्रीब्यूटर से आप अपने पैसों को निवेश करवा रहे हैं वो जरूरत पड़ने पर आसानी से उपलब्ध रहेगा भी या नहीं। टेलिफोन, ईमेल या मीटिंग के ज़रिए वो आपके संपर्क में रहना चाहिए।
कई निवेशक बार-बार और कई लोगों से अपनी संपत्ति और निवेश के बारे में बात करना नहीं चाहते हैं। उन्हें एक ऐसे सलाहकार की जरूरत होती है जो उनके निवेश को गुप्त तरीके से संभाल सके और किसी के साथ शेयर ना करे।
जिस शख्स पर भरोसा करके आप अपना पैसा उसे सौंप रहे हैं, उसका पुराना ट्रैक रिकॉर्ड भी जरूर चेक कर लें। उसने किस क्षेत्र में काम किया है और उसे कैसा ज्ञान है, आपको पता होना चाहिए। भारत में म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर्स के लिए कोई रेटिंग या रैंकिंग सिस्टम नहीं है।
इसलिए बेहतर होगा कि आप अपने आसपास के लोगों से डिस्ट्रीब्यूटर्स का रेफरेंस लें। सोशल मीडिया वेबसाइट के ज़रिए आप किसी करीबी से डिस्ट्रीब्यूटर का रेफरेंस ले सकते हैं। आप ऑनलाइन, दोस्तों, रिश्तेदारों के ज़रिए भी रेफरेंस ले सकते हैं।
एक अच्छे सलाहकार को मुआवज़ा यानि उसके काम की कीमत भी देनी पड़ती है। अपने सलाहकार से पूछें कि क्या वो आपके हर निवेश के लिए कमीशन लेगा। कुछ डिस्ट्रीब्यूटर आपके निवेश में लगाए गए समय और आपकी निजी जरूरत के आधार पर पैसे लेते हैं।
फाइनेंशियल प्लान बनाने में कई ऑनलाइन पोर्टल आपकी मदद कर सकते हैं। यहां से आपको फ्री में डाटा मिल जाएगा जबकि सीज़नल फाइनेंशियल प्लानर इसके लिए पैसे लेते हैं। फाइनेंशियल प्लान में आपके रिस्क उठाने की क्षमता, भविष्य की जरूरतें और जीवन के लक्ष्यों को ध्यान में रखा जाता है।
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