चाहे कोई महिला जॉब करती हो या ना करती हो वह घर की फायनेंशियल प्लानिंग में पूरा साथ देती है। तो अगर आप जॉब नहीं करती हैं तो यह सुनिश्चित करिये कि आप अपने पति की कमाई को प्रतिकूल परिस्थितियों के लिए बचा कर रखेंगी। ऐसा ना होने पर अगर कभी आपको उनकी अनुपस्थिति में खर्च चलाना हुआ तो आप अकेले कुछ नहीं कर पायेंगी। इसलिए जरुरी है कि भावनात्मक रूप से तो आप उनके साथ रहिये ही साथ ही वित्तीय रुप से भी उन्हें और खुद को मजबूत बनाइये।
अगर आप एक वर्किंग वुमन हैं तो फैमिली की सारी फायनेंशियल रिस्पॉन्सबिलटी आपकी बनती है इसलिए टर्म इंश्योरेंस का कवर आप लेकर रखें। बिना टर्म इंश्योरेंस के फायनेंशियल प्लानिंग करना ना के बराबर है क्योंकि इमरजेंसी में यही आपके काम आती है। टर्म इंश्यारेंस की पॉलिसी फायनेंशियल सुरक्षा तो प्रदान ही करती है साथ ही इसमें कई सारे रिवार्ड मिलते हैं और यह पॉलिसी कम दाम में भी मिल जाती है।
एक समझदार व्यक्ति बीमा योजना के रूप में टर्म इंश्योरेंस को समझ सकता है। इसमें पॉलिसीधारक एक निश्चित राशि प्रीमियम के रूप में देता है और इसके लिए निश्चित राशि का निर्णय भी लेता है। यदि पॉलिसी अवधि के दौरान बीमाधारक की किसी कारण वस मृत्यु हो जाती है तो इस बीमा राशि का लाभ पॉलिसी के नॉमिनी को देय है।
मान लीजिए आपके हसबैण्ड पहले से टर्म इंश्योरेंस की पॉलिसी ले चुके हैं तो भी एक फायनेंशियल पार्टनर होने के कारण आपको भी इससे जुड़ने की आवश्यकता है। यह निर्णय करने का पूरा अधिकार आपको है कि आप अपने परिवार को अपने अनुपस्थिति में खुश देखना चाहते हैं या दुखी। दूसरी बात यह कि शायद आपके पति के टर्म इंश्योरेंस कवर से आप वह लिविंग स्टैण्डर्ड नहीं पा सकते हैं जो आप दोनों के टर्म पॉलिसी लेने से कवर की जा सकती है।
कुल आय को कवर करने की गणना करने के लिए एक आय रिप्लेसमेंट मैथड भी है, जो कि तब काम आएगी जब कमाई करने वाले व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है। 40 वर्ष से कम आयु वाले व्यक्ति के लिए एनुअल इनकम का 20 से 30 गुना टर्म कवर के बराबर चुना जाना चाहिए। टर्म इंश्योरेंस कवर हमेशा वर्तमान के खर्चों और भविष्य के लायबिलटी को देखकर लेना चाहिए।
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