अगर आप म्यूचुअल फंड के माध्यम से इंवेस्ट करने की सोच रहे हैं तो रुकिये, क्या आप म्यूचुअल फंड की सारी योजनायें और विधियां जैसे कि पिछला फंड और पोर्टफोलियो के बारे में जानते हैं? यदि नहीं तो हम आपको इन सब चीजों के बारे में बतायेंगे। कई बार ऐसा होता है कि बिना सोचे समझे आप निवेश कर देते हैं लेकिन आप को जितनी उम्मीद होती है उतना रिटर्न नहीं मिलता है जिसके कारण घाटा भी उठाना पड़ जाता है। इसकी वजह मानी गई है फंड के बारे में सही जानकारी न होना।
यहां पर हम सबसे पहले आपको म्यूचुअल फंड की सामान्य जानकारी देंगे-
अगर आप एक निवेशक हैं यानी की आपको कहीं पर निवेश करना है लेकिन आपको शेयर और स्टॉक मार्केट के बारे में कुछ नहीं पता है ऐसे में आप म्यूचुअल फंड एक्सपर्ट की मदद लेते हैं। आपको कहां,कैसे और क्यूं इन्वेस्ट करना है, इसके लिए क्या योजनाएं हैं ये सब म्यूचल फंड के अंतर्गत आयेगा। म्यूचुअल फंड स्कीम के अंतर्गत निवेशक से पैसा एकत्र किया जाता है साथ ही शेयर खरीदे और बेचे जाते हैं।
इन्वेस्ट से पहले इन बातों पर रखना होगा ध्यान:
किसी भी म्यूचुअल फंड को समझने के लिये उस फंड के पिछले दो-तीन साल के प्रदर्शन को देखें। क्योंकि इससे यह पता चल जायेगा कि पिछले फंड से हमें कितना रिटर्न प्राप्त हुआ या फिर कैसा प्रदर्शन रहा। इसको हम इस तरह से समझ सकते हैं कि अगर कोई फंड तीन साल से मार्केट में है और उसमें 15 हजार का निवेश किया गया है तो यह देखना होगा कि आज के समय में 15 हजार रुपए की वैल्यू क्या है और उसमें कितना फीसदी रिटर्न साल दर साल मिला है।
इन्वेस्टर म्यूचुअल फंड में इसलिए इन्वेस्ट करता है क्योंकि इसमें शेयर मार्केट से कम रिस्क होता है। शेयर मार्केट में कोई निवेशक खुद से शेयर का चुनाव करने में असमर्थ होता है, जबकि म्यूचुअल फंड का चुनाव वह कर सकता है। इसलिए म्यूचुअल फंड में इन्वेस्ट करने से पहले उसका पोर्टफोलियो चेक करना बहुत जरूरी होता है।
लोगों के बीच यह धारणा है कि म्यूचुअल फंड एक ऐसा निवेश है, जिसमें जितना रिस्क लेंगे उतना ज्यादा रिर्टन आपको मिलेगा, तो यह धारणा बिल्कुल ही गलत है। कोई भी म्यूचुअल फंड इस स्कीम पर काम नहीं करता है। बेहतर होगा यदि आप कम रिस्क वाले ही म्यूचुअल फंड लें, ताकि धीरे-धीरे अच्छी मात्रा में रिटर्न मिल सके। इसका आंकलन करने के लिए समान श्रेणी के दो म्यूचुअल फंड की तुलना करें उस समय जब बाजार में तेजी से उछाल आया हो या गिरावट आयी हो। इससे बेहतर चुनाव करने में आसानी होगी ।
कास्ट यानी कीमत। इस बात का हमेशा ध्यान रखें कि म्यूचुअल फंड कोई नॉन प्रॉफिट ऑर्गनाइजेशन या चैरिटी नहीं है। हर कंपनी अपना नफा- नुकसान सोच कर आगे बढ़ती है। म्यूचुअल फंड में निवेश करते समय आपके लिए कई तरह के हिडेन चार्जेस होते हैं उनके बारे में पता लगाने के लिए फंड की टर्म एंड कंडीशन के बारे में जरुर पढे़ं । इसमें निवेश करने वाला मूल धन ब्याज के साथ एक निश्चित समय अंतराल पर बढ़ता या घटता है उस समय अंतराल का और दरों का हिसाब हमेशा अपने पास रखें।
भारत में म्यूचुअल फंड के कई प्रकार हैं जैसे कि इक्वटी फंड, डेब्ट फंड, बैलेंस फंड, मनी मार्केट म्यूचुअल फंड और गिल्ट फंड। ये सभी म्यूचल फंड के अलग-अलग प्रकार हैं जिसकी अलग-अलग स्कीम है। तो जब भी इन्वेस्ट करने का सोचें तो एक बार एक्सपर्ट की राय जरुर लें।
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