सरकार संसद के शीतकालीन सत्र को तय समय से पखवाड़ा भर पहले ही बुला सकती है, ताकि वस्तु व सेवा कर (जीएसटी) से जुड़े विभिन्न समर्थनकारी कानूनों को पारित करवाया जा सके। सरकार जीएसटी को अगले साल 1 अप्रैल से कार्यान्वित करना चाहती है।
संसद का शीतकालीन सत्र आमतौर पर नवंबर के तीसरे या चौथे हफ्ते में होता है, लेकिन इस साल सरकार इसे त्योहारी सीजन समाप्त होने के तुरंत बाद आहूत करना चाहती है। सरकारी अधिकारी के अनुसार, अगर संसद का शीतकालीन सत्र थोड़ा पहले शुरू होता है तो केंद्रीय जीएसटी (सीजीएसटी) और एकीकृत जीएसटी (आईजीएसटी) विधेयकों को नवंबर या दिसंबर के शुरू में पारित करवाया जा सकेगा। इन विधेयकों के पारित होने से जीएसटी के कार्यान्वयन का मार्ग प्रशस्त होगा।
गौरतलब है कि उक्त दोनों विधयेक उस संविधान संशोधन विधेयक के समर्थन में हैं, जिन्हें संसद के मॉनसून सत्र में पारित किया गया था। संविधान संशोधन विधेयक को अब तक असम, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, हिमाचल प्रदेश, गुजरात, दिल्ली व मध्य प्रदेश सहित आठ राज्य विधानसभाएं मंजूरी दे चुकी हैं। इसे कानून बनाने के लिए 31 में से आधे राज्यों की मंजूरी जरूरी है।
अधिकारी ने कहा कि महाराष्ट्र व हरियाणा में उक्त संविधान संशोधन विधेयक को जल्द ही मंजूरी मिलने की उम्मीद है और जरूरी आंकड़ा सितंबर तक हासिल होने की उम्मीद है। अधिकारी के अनुसार, 'विधेयक की पुष्टि करने की राज्यों की जरूरी संख्या के साथ हमारा मानना है कि संसद के शीतकालीन सत्र को छठ पूजा सहित त्योहारी सीजन के बाद 9 या 10 नवंबर को आहूत किया जा सकता है।' उन्होंने कहा कि इसके लिए सभी राजनीतिक दलों की सहमति की जरूरत होगी।
सरकार का मानना है कि नई राष्ट्रीय कर प्रणाली को आधे राज्यों की विधानसभाओं की मंजूरी मिलने के बाद जीएसटी परिषद को सक्रिय किया जा सकता है कि ताकि टैक्स दरों, स्लैब व छूट आदि का फैसला किया जा सके। अधिकारी ने कहा कि विधेयकों को अगर शीतकालीन सत्र में मंजूरी मिल जाती है तो इससे 1 अप्रैल 2017 से जीएसटी के कार्यान्वयन की तैयारी के लिए पर्याप्त समय होगा।
जीएसटी टैक्स की दर 18 प्रतिशत रखी गई है। इससे जनता को ही लाभ होगा। इस टैक्स प्रणाली के लागू होने से वैट और एक्साइज दोनो हट जाएगें और जनता को सीधे तौर पर बस 18 प्रतिशत का टैक्स चुकाना होगा। जीएसटी से आम आदमी को क्या फायदा है इसके बारे में हम आपको विस्तार से आगे की स्लाइड्स में बता रहे हैं-
एक देश, एक टैक्स सिस्टम के तहत केंद्र सरकार ने लोकसभा में जीएसटी बिल पास किया है। जीएसटी से FMCG अर्थात फास्ट मूविंग कस्टमर गुड्स की कंपनियां जैसे हिंदुस्तान युनीलीवर, गोदरेज जैसी कंपनियों के प्रोडक्ट्स के दाम में कमी आ सकती है। अगर ये कंपनियां ग्राहकों तक जीएसटी का लाभ पहुंचाती हैं तो रोजमर्रा के सामान जैसे साबुन, टूथपेस्ट के दामों में कमी आ सकती है।
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