हैदराबाद की एक निजी कंपनी में कार्यरत विजय तिवारी अब अपना घर लेने की सोच रहे हैं। विजय पिछले 6 साल से किराए के घर में रहे हैं। इन्होंने सोचा कि जो पैसा घर के किराए में जा रहा है अगर उसी पैसे में कुछ और रकम जोड़ कर हर महीने ईएमआई दी जाए तो अपना खुद का एक छोटा सा आशियाना हो सकता है। इसी सपने की उधेड़-बुन में वह बैंक गए जहां उन्होंने होम लोन के लिए आवेदन किया।
बैंक ने उन्हें एक फॉर्म दिया और लोन संबंधी बातों से अवगत कराया। विजय तिवारी को लगा कि अब उनके घर का सपना पूरा ही होने वाला है लेकिन तभी बैंक ने उनके लोन की अर्जी ठुकरा दी। विजय बैंक के इस रवैए से हैरान थे. उन्होंने अपनी परेशानी अपने दोस्त ईश्वर को बताई जिसके बाद ईश्वर ने उन्हें बताया कि अगर उनका कोई पुराना लोन या क्रेडिट कार्ड का बैलेंस या आयकर का भुगतान होता बैंक लोन के लिए आवेदन स्वीकार नहीं करेगा। बाद में विजय तिवारी ने पता किया तो बैंक ने बताया कि वह 10% के टैक्स स्लैब में हैं और उन्होंने अपना आयकर रिटर्न नहीं दिया है जिससे उनके लोन की अर्जी खारिज हो गई।
ऐसी बातें कई लोगों के साथ हो सकती हैं अगर वह छोटी-छोटी बातों का ध्यान न रखें तो बाद में परेशानी का सामना करते हैं। मौजूदा वक्त में लोन हर व्यक्ति की जरूरत बन चुका है। घर लेने के मामले में आमतौर पर सभी को बैंक से लोन का ही सहारा लेना पड़ता है। अगर आप लोन लेते वक्त कुछ जरूरी बातों पर ध्यान नहीं देंगे तो बैंक आपके लोन की अर्जी को खारिज कर देगा। यहां हम आपको बताएंगे कुछ जरूरी बातें जिन्हें लोन के आवेदन के वक्त ध्यान रखें ताकि आपके लोन की अर्जी खारिज ना हो।
अगर आपने लंबे वक्त से अपने क्रेडिट कार्ड का भुगतान नहीं किया है तो आपको लोन मिलने में मुश्किल आ सकती है। क्रेडिट कार्ड का भुगतान लंबे वक्त तक बकाया रहने के कारण उस पर पेनाल्टी और ब्याज लग जाता है जिससे रकम और अधिक हो जाती है। कई बार लोग पेमेंट के लिए बैंक जाकर सेटेलमेंट की गुजारिश करते हैं। जिससे बैंक कुछ रियायत देता है। अगर आप बैंक के साथ क्रेडिट कार्ड के भुगतान को लेकर सेटेमेंट करते हैं तो इससे आपकी क्रेडिट हिस्ट्री खराब हो जाती है और बैंक आपको लोन देने से मना कर सकता है।
अगर आपने कभी कोई ऋण लिया है या कभी किसी क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल नहीं किया है तो भी आपको लोन मिलने में परेशानी हो सकती है। क्रेडिट इन्फॉमेर्शन ब्यूरो (इंडिया) लिमिटेड या सिबिल आपकी क्रेडिट हिस्ट्री पर नजर रखता है। अगर आपने कभी कोई ऋण नहीं लिया है तो बैंक ये इस बात के आंकड़े ही नहीं मिलेंगे कि आप उसका ऋण कैसे चुकाएंगे। ऐसी स्थिति में हो सकता है कि बैंक आपको लोन ना दे।
अगर आपने कभी कोई पुराना लोन लिया है और उसका भुगतान अभी बाकी है तो बैंक आपको लोन देने से मना कर सकता है। बैंक इस बात पर पूरी नजर रखता है कि आपने पुराने लोन की किश्तें सही समय पर चुकाई हैं या नहीं। अगर आप लोन की किश्त चुकाने में असमर्थ हैं तो बैंक आपको डिफाल्टर घोषित कर देता है। एक बार किसी बैंक से डिफाल्टर घोषित हो जाने के बाद आपकी क्रेडिट हिस्ट्री खराब हो जाएगी और फिर बैंक कभी किसी डिफाल्टर को लोन नहीं देता हैं।
आपकी सालान आय कुछ भी हो आपको इन्कम टैक्स जरूर फाइल करना चाहिए। ये जरूरी नहीं कि आप टैक्स स्लैब में आएं और तभी आयकर रिटर्न फाइल करें। बैंक से लोन लेने वक्त आपसे पिछले दो साल की आयकर रिटर्न की जानकारी मांगी जाती है। अगर आपने आईटीआर फाइल किया है और आपका हिसाब दुरुस्त है तो ठीक है और अगर आपने कोई आयकर नहीं फाइल किया है तो आपको बैंक ऋण देने से मना कर सकता है।
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