अब बीमा सिर्फ भविष्‍य को सुरक्षित बनाएं रखने के लिए ही नहीं बल्कि ऋण लेने के काम भी आएगा। इन दिनों, थ्री-वन और फोर-वन प्‍लान को वित्‍तीय उत्‍पादों के बदलते रूझानों के कारण लाया जा रहा है। जिस बीमा योजना को पहले हम सभी प्रोटेक्टिव कवर के तौर पर जानते थे, अब वहीं बीमा, कवरेज, निवेश, कर लाभ और ऋण की सुविधा भी प्रदान करेगा।

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कई लोगों को यह मालूम नहीं होता है कि जीवन बीमा पर ऋण भी मिल सकता है, आमतौर पर लोगों को यही मालूम होता है कि ऋण सिर्फ व्‍यक्तिगत तनख्‍वाह पर ही लिया जा सकता है और इसी कारण, लोग इसका लाभ नहीं उठा पाते हैं।

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बीमा पॉलिसी पर ऋण किस प्रकार लिया जाता है?

वर्तमान समय में सभी सरकारी और निजी सेक्‍टर की बैंक, बीमा पर ऋण देती हैं। हालांकि, बीमा पॉलिसी पर मिलने वाला ऋण, व्‍यक्तिगत ऋण की भांति कम होता है लेकिन मिल जाता है। इस ऋण को लेने के दौरान बीमा पॉलिसी को गांरटी के तौर पर रखना होता है।

आपकी ऋण पात्रता का निर्णय किस प्रकार लिया जाता है?

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सभी बीमा पॉलिसी, ऋण के लिए पात्र नहीं होती हैं। जीवन बीमा योजनाएं, जैसे- बंदोबस्‍ती नीति, मनी बैक प्‍लान और यूनिट लिंक्‍ड इंश्‍योरेंस पॉलिसी (यूलिप), ऋण के लिए पात्र होती हैं, इन पर बैंक ऋण देने को तैयार हो जाती है। जबकि अन्‍य बीमा योजनाओं पर ऋण नहीं मिलता है, ऐसा इसलिए होता है क्‍योंकि टर्म प्‍लान के साथ किसी भी प्रकार की कैश वैल्‍यू जुड़ी हुई नहीं होती है और प्‍लान, टर्म समाप्‍त होने के साथ नो रिर्टन के सहित निष्‍क्रय हो जाता है।

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नॉन-टर्म प्‍लान, जिसमें समय पर प्रीमियम का भुगतान किया जाता है और इसकी न्‍यूनतम अवधि 3 साल होती है, ऋण के लिए पात्र होता है?

ऋण, उन सभी बीमा पॉलिसियों पर दिया जाता है जो यूनिट लिंक्‍ड प्‍लान के लिए पेड अप वैल्‍यू का 70-75 प्रतिशत तक ऑफर देते हैं, जबकि यह गांरटी रिर्टन के साथ पारंपरिक योजनाओं के लिए 85-90 प्रतिशत तक जा सकता है। अन्‍य प्रकार के ऋण जैसे- व्‍यक्तिगत ऋण आदि में व्‍यक्ति की आय को आधार मानकर ऋण दिया जाता है लेकिन बीमा पॉलिसी पर दिया जाने वाला ऋण का आय से कोई मतलब नहीं होता है। हालांकि, उधारकर्ता की ऋण पात्रता, उसके क्रेडिट स्‍कोर की जांच करने के बाद खाते में ले जाई जाएगी।

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किन-किन दस्‍तावेज़ों की आवश्‍यकता पड़ती है?

बीमा पॉलिसी पर ऋण लेने के लिए, सबसे पहले एक आवेदन पत्र को भरना पड़ता है। इसके बाद, पॉलिसी की मूल प्रति को जमा करवा दिया जाएगा और पॉलिसी के लाभों को लोन की अवधि के दौरान, बैंक या कम्‍पनी में जमा रखा जाएगा और इसके लिए, व्‍यक्ति को पेपर्स पर हस्‍ताक्षर करने होंगे।

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जब तक ऋण की राशि, को चुका नहीं दिया जाता है जब तक पॉलिसी, एक जमानत सुरक्षा के रूप में प्रभावी रहेगी। बैंक को पॉलिसी की भविष्‍य में जमा की जाने वाली प्रीमियमों की रसीद भी चाहिए होती है और जीवन बीमा पर ऋण के दस्‍तावेज़ीकरण को पूरा करने के लिए एक कैंसल चेक भी देना पड़ता है।

ऋण को किस प्रकार चुकाया जाता है?

जीवन बीमा पर दिया जाने वाला ऋण का भुगतान, किस्‍तों में किया जाता है, यह कम्‍पनी या बैंक के अनुसार, अलग-अलग होता है। इसकी न्‍यूनतम अवधि 6 महीने होती है। कई कम्‍पनियां और बैंक, शेष पॉलिसी टर्म के हिसाब से भी ऋण को ऑफर करती हैं और वे बिना किसी चार्ज के ऋण की अदायगी कर सकती हैं।

जीवन बीमा पॉलिसी पर दिए जाने वाला ऋण पर क्‍या ब्‍याज दरें लागू होती हैं?

जीवन बीमा पॉलिसी पर दिए जाने वाला ऋण पर लागू ब्‍याज दरें, भुगतान किए गए प्रीमियम और दिए जाने वाले प्रीमियम की संख्‍याओं पर निर्भर करता है। पॉलिसी पर दिए जाने वाले ऋण पर ब्‍याज दरें, साधारण ऋण पर होने वाली ब्‍याज दरों से कम ही होती हैं।

साधारणता, बैंक, अपने बेस रेट के साथ ब्‍याज की दर को लिंक कर देती है। इसके लिए भी अलग-अलग नियम होते हैं। मोटे तौर पर, भारतीय जीवन बीमा निगम की वर्तमान ब्‍याज दरें, 9 प्रतिशत हैं जिनका छमाही भुगतान किया जाता है। बैंक ऋण की ब्‍याज दरें, 10 प्रतिशत से 14 प्रतिशत तक हो सकती हैं और बीमा के प्रकार पर निर्भर करती हैं।

जीवन बीमा पॉलिसी पर लिए जाने ऋण के दौरान ध्‍यान देने योग्‍य बातें:

1. ऋण के लिए आवेदन करने से पहले सारी बातों को ध्‍यान में रखने की आवश्‍यकता होता है कि आपको कितने समय तक किस हिसाब से इसे अदा करना होगा।
2. पॉलिसी की अवधि के दौरान, ऋण को चुका देना चाहिए। ऋण चुकता के दौरान किसी भी चूक के होने पर, किसी भी दावे को बकाया राशि से कटौती करने के बाद विचार किया जाएगा।
3. ऋण देने के बाद, पॉलिसी के परवर्ती प्रीमियम का गैर-भुगतान होने की स्थिति में पॉलिसी को कुछ बीमा कम्‍पनियां समाप्‍त कर देती हैं।
4. व्‍यक्तिगत ऋण लेने के बजाय, बीमा पॉलिसी पर ऋण आसानी से मिल जाता है और इसमें ब्‍याज दर भी कम होती है। इन बिन्‍दुओं को ध्‍यान में रखते हुए पॉलिसी पर ऋण लिया जा सकता है।