गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम (जीएमएस) की घोषण बजट 2015 में की गर्इ थी। इस नर्इ योजना का शुभारम प्रधानमंत्री मोदी ने 5 नवम्बर 2015 को किया है। जीएमएस, गोल्ड डिपाजिट स्कीम 1999 के स्थान पर लार्इ गर्इ है। गोल्ड़ डिपाजिट स्कीम के तहत किसी व्यक्ति की डिपजिट बकाया है,तो उसे रखने की अनुमति दी जायेगी, बशर्ते वह परिपक्कता अवधि के पूर्व ही डिपाजिट को नहीं निकाल लें।

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सोना भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) द्वारा प्रमाणित संग्रह और पवित्रता परीक्षण केन्द्र (CPTC) में स्वीकार किया जाएगा। जमा प्रमाण पत्र सोने की 995 शुद्धता के समतुल्य बैंकों द्वारा जारी किए जाएंगे।

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पात्र कौन हैं?

सभी व्यक्ति, एचयूएफ, सेबी के अन्तरगत रजिस्टर्डसभी म्यूचल फंड़/एक्सचेंज ट्रेड़ फंड को इस योजना के तहत जमा कराने अनुमति दी जायेगी। इस योजना के तहत एक बार में न्यूनतम 995 शुद्धता का 30 ग्राम सोना जमा कराया जा सकेगा। इसमें सम्मिलित है-बार, सिक्का, ज्वेलरी जिसमें पत्थर और अन्य धातु नहीं हों। इस योजना के अन्तरगत अधिकतम सोना जमा कराने की कोर्इ सीमा नहीं है।

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जमा विवरण

मान्यता प्राप्त बैंक गोल्ड डिपाजिट योजन को स्वीकार करेंगे। तीन तरह की गोल्ड डिपाजिट उपलब्ध होगी

शोर्ट ट्रम बैंक डिपाजिट (एसटीबीडी)- एक से तीन वर्ष, मध्यम - पांच से सात वर्ष तथा लोंग टर्म गवरमेंट डिपाजिट स्कीम ( बारह से पंद्रह वर्ष)। इसमें परिपक्कता अवधि के पूर्व भी निकासी के प्रावधान रखें जायेंगे, परन्तु इसका का न्यूनतम लॉक परियड़ होगा और बैंक पेनल्टी भी लगायेंगे।

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ब्याज

सोने को रिफाइन्ड गोल्ड में परिवर्तित कर इसे ट्रेड के लिए उपयुक्त बनाया जायेगा। सोने के शुद्धिकरण के तीस दिन बाद या नामित बैंक सीपीटीसी की रसीद देगा उसके बाद ब्याज देय होगा।

शिकायतें

किसी भी नामित बैंक द्वारा रसीद जारी करने, जमा प्रमाणपत्र, जमा के संबंध में विवाद या ब्याज के भुगतान के संबंध कोर्इ भी विवाद उत्पन होगा, इसका निपटारा संबंधित बैंक के ग्रिवयान्सेस रिएड्रेस प्रोसेस द्वारा किया जायेगा और इसे रिजर्व बैंक के सज्ञान में लाया जायेगा।