आयकर रिटर्न दाखिल करने के दौरान गलती होने की संभावना बहुत अधिक रहती है। अगर रिटर्न भरने के दौरान किसी प्रकार की गलती हो जाती है तो आप मूल्‍यांकन किए जाने से पूर्व आयकर रिटर्न को संशोधित कर सकते हैं और नियत तिथि से पहले रिटर्न को भर सकते हैं।

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सबसे पहले आपको पूरी सावधानी के साथ आयकर रिटर्न को दाखिल करना चाहिए, लेकिन अगर किसी कारणवश कोई गलती हो जाती है या आपसे कुछ जानकारी भरना छूट जाती है तो आप दुबारा भरें, इसका विकल्‍प भारतीय कर प्रणाली में दिया जाता है।

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मूल्‍यांकन वर्ष से पहले ही आपको एक वर्ष के भीतर, आयकर रिटर्न को संशोधित करने का समय मिलता है। उदाहरण के लिए- वित्‍तीय वर्ष 2013-14 के लिए आपने आयकर रिटर्न दाखिल किया, तो आप मार्च 2016 से पूर्व इसे संशोधित कर सकते हैं। लेकिन अगर एक बार इसका मूल्‍यांकन हो गया, तो आप संशोधन नहीं कर सकते हैं।

पढ़ें- आयकर रिटर्न से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें

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आय में दी जाने वाली जानकारी में संशोधन किसी गलत इरादे से नहीं किया जाना चाहिए। इसके अलावा, किसी तथ्‍य, सूचना या जानकारी को गलत भी नहीं देना चाहिए। याद रहें, एक बार संशोधन कर लिया जाता है तो मूल रिटर्न हट जाता है। अगर आईटी विभाग, जांच पड़ताल में जान लें कि संशोधन किसी गलत इरादे से किया गया है तो निर्धारिती को अधिनियम के तहत दंड भी दिया जा सकता है।

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साथ ही साथ यह भी याद रखना आवश्‍यक है कि देरी से भरे गए रिटर्न का संशोधन संभव नहीं है। मान लीजिए, अगर आयकर रिटर्न की तिथि 31 जुलाई है और आपने इसके बाद रिटर्न भरा है तो आपके द्वारा भरे गए रिटर्न पर संशोधन करना संभव नहीं है।

अगर आप अपनी आय को संशोधन करके छुपाना चाहते हैं तो आपको जानकारी होनी चाहिए कि इसका पता लग जाने पर आपको तीन गुनी राशि का दंड भुगतना पड़ सकता है; क्‍योंकि संशोधित रिटर्न की जांच, आयकर प्राधिकरण के द्वारा की जा सकती है। इसलिए, बेहतर होगा कि कुछ भी छुपाने का प्रयास न करें।

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अगर कोई निर्धारिती, संशोधन में उच्‍च आय को दर्शाएं तो उस पर किसी भी प्रकार का दंड नहीं लगाया जाएगा।