कर्इ बार वित्तीय आवश्यकता को देखते हुए हमें कर्इ तरह के लोन वित्तीय या अचल सम्पति को गिरवी रखना पड़ता है। शेयर, सोना या अचल सम्पति इनमें से मुख्य हैं, जिनका उपयोग बहुधा लोन लेने के लिए किया जाता है। बैंक या वित्तीय संस्थान, जो सम्पदा को गिरवी कर रख कर लोन देते हैं, वे सारी राशि लौटा देने के बाद सम्पदा पुन: सौंप देते हैं। निवेशक के लिए भी प्रोपर्टी पर लोन लेना एक अलग विकल्प है।
अचल सम्पति का आंकलन ज्यादा होता है, इसलिए आपको बहुत अधिक ऋण मिल सकता है, किन्तु जब भी आप प्रोपर्टी से लोन लेना चाहें, निम्न बातें प्रोपर्टी से लोन लेने के पहले नोट कर लेनी चाहिये:
1- यह बात याद रखें कि आप ऋण लेने के लिए अपने मकान या सम्पदा को गिरवी रख रहे हैं।
संपदा को गिरवी रख कर उतना ही लोन लेंवे, जिसको पुन: चुकाने की क्षमता आपके पास हों। यह स्वत: स्पष्ट है कि आप अपनी प्रोपर्टी से लोन लेने के लिए उसे गिरवी रख रहे हैं और यदि नहीं चुका पायेंगे, तो उसे पुन: अपने अधिकार में नहीं लें पायेंगे। इस तरह का लोन तभी लेवें जब आप की लगभग एक निश्चित आय हो।
2- प्रोपर्टी के मुल्यांकन के आधार पर अलग-अलग बैंक कितना लोन दे रहा है, इसकी जांच कर लें
प्रोपर्टी के मूल्यांकन का तरीका भी सभी बैंकों का एक सा नहीं होता और जो मूल्यांकन किया जाता है, इसका कितना अनुपात में ऋण दिया जाता है, यह भी एक समान नहीं होता। अत: आपको जो ऋण मिलेगा, उसकी राशि में अंतर आयेगा। सार्वजनिक बैंक प्रोपर्टी के मूल्यांकन का 65 प्रतिशत तक ऋण दे देते हैं।
3- ब्याज की दर में अंतर हो सकता है
ऋण पर ब्याद की दर में एक बैंक से दूसरे बैंक की दर में अंतर हो सकता है। कर्इ बैंक तो पर्सनल लोन पर जो ब्याज लिया जाता है, उससे भी कम ब्याज की दर में आपको लोन दे देते हैं।
जो लोन लेते हैं, वे बहुधा इसी विकल्प को चुनना पसंद करते हैं। सार्वजनिक बैंको की ब्याज दर 12 से 14 प्रतिशत तक होती है, किन्तु निजी बैंको की ब्याज दर इससे ज्यादा निर्धारित कर सकते हैं।
4- लोन लेने के लिए कोमर्सियल प्रोपर्टी का मूल्यांकन कर उस पर लोन देने का अनुपात कम रखा जाता है
कोमर्सियल प्रोपर्टी पर लोन देने का अनुपात कम रखा जाता है। एक अपार्टमेंट या रेसिडेंसियल हाऊस का मूल्यांकन इस पर लोन की राशि का अनुपात एक कोमर्शियल प्रोपर्टी के मूल्यांकन के अनुपात से ज्यादा होता है। प्रोपर्टी का मूल्यांकन भी इस बात पर निर्भर करता हैं कि प्रोपर्टी स्वयं की है या किराये पर ली गयी है।
निष्कर्ष: यह बात भी याद रखें कि आप अपनी प्रोपटी से लोन तभी लें, जब इसकी आपको बहुत आवश्यकता हों। पर्सनल लोन की अपेक्षा सम्पदा को गिरवी रख कर लोन लेना सस्ता विकल्प है।
लोन को चुकाने के इतिहास की भी लोन लेने के संबंध में महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इस तथ्य को भी याद रखें।
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