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एफडी कैल्‍कुलेटर: फिक्स्ड डिपॉजिट ब्याज दरों का कैल्कुलेटर

बैंकों की ब्‍याज दरें पिछले कई त्रैमासिक से नीचे गिर रही हैं। इसलिये यह जरूरी है कि आप जान लें कि एफडी से अधिकतम लाभ कैसे प्राप्त कर सकते हैं। हम आपको बैंक ब्याज दर कैल्कुलेटर मुहैया करा रहे हैं, जिसे इस्तेमाल करना बेहद आसान है और यह अधिकतम लाभ प्राप्त करने में आपकी मदद करेगा।

मूलधन
ब्याज दर
जमा अवधि
अवर्ती

बैंक ब्याज दर कैल्कुलेटर का प्रयोग क्यों करें?

यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि बड़ी धनराशि की ब्याज दर में, 0.25 प्रतिशत का अंतर भी बहुत मायने रखता है। इस कैल्कुलेटर को प्रयोग करने का एक कारण यह भी है कि यह ठीक वैसे ही है, जैसे कि आप ब्याज दर पता करने के लिये अपने इलाके में एक बैंक से दूसरे बैंक जाते थे। उधाहरण के तौर पर- इसका प्रयोग कर आप जान सकते हैं कि कौन सा बैंक सबसे ज्यादा ब्याज दर मुहैया करा रहा है और मेच्योर होने पर आपको सबसे ज्यादा धन कौन सा बैंक देगा।

तो उधारण के लिये यदि आरबीएल बैंक आपको आईसीआईसीआई बैंक की तुलना में अधिक ब्याज दर मुहैया कराता है, तो उसी क्षण आप आरबीएल को चुन सकते हैं। यह चिंता करने की भी जरूरत नहीं कि उस बैंक की शाखा आपके इलाके में है या नहीं। आप फिक्स्ड डिपॉजिट ऑनलाइन ओपन कर सकते हैं और ज्यादातर बैंक इस कार्यके लिये अपने एक्जिक्यूटिव घर तक भेजते हैं। वे घर आकर जरूरी दस्‍तावेज ले जाते हैं।

तो कैल्कुलेटर का प्रयोग कर ब्याज दरों की ऑनलाइन तुलना करने से आपको लाभ प्राप्त हो सकते हैं। कुछ चीजें हैं जो ध्‍यान रखने वाली हैं, वो यह कि जब भी बात जब बैंक डिपॉजिट की आये तो उस पर कर लगता है।

तो यदि आपको 10,000 रुपए से अधिक का ब्याज प्राप्त हुआ है तो बैंक टीडीएस काटेगा। यदि आप टीडीएस नहीं कटवाना चाहते हैं तो आपको फॉर्म 15G और फॉर्म 15H भरकर जमा करने होंगे।

सावधि जमा यानी फिक्स्ड डिपॉजिट क्‍या है?

एक फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) एक वित्तीय उपक्रम है, जो बैंक नियमित बचत खाताा की तुलना में अधिक ब्याज दरों पर ग्राहक को मुहैया कराते हैं। इसे टाइम डिपॉजिट भी कहते हैं। यह निवेश के सबसे सुरक्षित विकल्‍पों में से एक है।

फिक्स्ड डिपॉजिट के बारे में:

सावधि जमा का मुख्‍य उद्देश्‍य यह होता है कि ग्राहक अपने धन पर इससे अधिकतम ब्याज प्राप्त कर सके। धन एक बार ही जमा किया जा सकता है। अगली बार जमा करने के लिये अलग से अकाउंट खोलने की जरूरत पड़ती है। जमाकर्ता को प्रमाण के रूप में फिक्‍स्ड डिपॉॉजिट सर्टिफिकेट प्रदान किया जाता है। परिपक्वता के समय धन प्राप्त करने के लिये या आगे के लिये रिन्यू करवाने के लिये ग्राहक को वह प्रमाण पत्र बैंक को दिखाना होता है। यदि जमाकर्ता का निधन हो जाये तो नॉमिनी भी वह प्रमाण पत्र दिखाने पर ही धन प्रकर सकता है।

फिक्स्ड डिपॉजिट के लाभ :

  • अन्‍य डिपॉजिट की तुलना में फिक्स्ड डिपॉजिट में ब्याज दरें हमेशा अधिक रहती हैं।
  • ग्राहक एफडी पर उसकी वैल्यू का 80 से 90 फीसदी तक ऋण प्राप्त कर सकता है।
  • इसकी अवधि की सीमा बहुत अधिक होती है- इसमें आप 7 दिन से लेकर 10 साल की अवध‍ि तक के लिये पैसा जमा करने की योजना बना सकते हैं।
  • ऑटो रिन्युवल की सुविधा।
  • 5 वर्ष से अधिक समय सीमा के फिक्स्ड डिपॉजिट पर आपको आयकर नियम 1961 के अधिनियम U/S 80C के तहत कर में लाभ प्राप्त होते हैं।
  • एफडी निवेश का बहुत ही आकर्षक विकल्प माना जाता है, क्‍योंकि इसमें अच्छा मुनाफा मिलता है और बिना किसी जोखिम के यह सुरक्षित होता है। आपको अपने निवेश पर निश्चित तौर पर लाभ मिलता है।

फिक्स्ड डिपॉजिट के नुकसान:

  • निवेश के रूप में एफडी में जोखिम कम है और इसी कारण अन्‍य जोखिम भरे निवेशों की तुलना में इस पर मिलने वाला लाभ कम होता है।
  • जब आपका पैसा बैंक में एक निश्चित अवधि के लिये लॉक हो जाता है, तो उस नकदी को बीच में प्राप्त करना आसान नहीं होता। आप अचानक जाकर बैंक से एफडी का पैसा प्राप्त नहीं कर सकते हैं।
  • सच तो यह है कि यदि आप तय समय अवधि के पहले पैसा निकालेंगे तो आपको हर्जाना भरना होगा।
  • इंफ्रास्‍ट्रक्चर बॉन्‍ड या राष्‍ट्रीय बचत प्रमाण पत्र (एनएससी), आदि को छोड़ कर, 5 साल से कम के सावधि जमा पर आयकर में छूट नहीं मिलती है। तो आयकर के मद्देनजर यह निवेश का सर्वोत्तम विकल्‍प नहीं है।

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