Englishಕನ್ನಡമലയാളംதமிழ்తెలుగు

सोने (GOLD) में निवेश करने से पहले पढ़ लें इन जरूरी सवालों के जवाब

अक्सर यह प्रश्न पूछा जाता है कि, मैं सोना क्यों खरीदूं? आइये हम आपको इस प्रश्न का उत्तर बताते हैं।

Written by: Ashutosh
Subscribe to GoodReturns Hindi

यदि आप भारत में सोने में निवेश करना चाहते हैं तो बहुत से विकल्प उपलब्ध हैं। पहले यह देखें कि सोने में निवेश करने से पहले क्या करना चाहिए, सोने में निवेश क्यों करना चाहिए, कर देयता (टैक्स) , विभिन्न निवेश विकल्प और सोने के बारे में आप जो कुछ जानना चाहते हैं, उन सभी बातों की जानकारी होनी चाहिए। यहां हम आपको बताएंगे कि सोने में निवेश कैसे करें और जो लोग पहली बार सोने में या फिर गोल्ड ईटीएफ में निवेश करना चाहते हैं उन्हें क्या करना चाहिए।

कौन-कौन से दस्तावेज हैं जरूरी

सोने में निवेश के लिए किन दस्तावेजों की आवश्यकता होती है? यदि आप 2 लाख रूपये से अधिक मूल्य का भौतिक सोना (सोने की कोई वस्तु जैसे गोल्ड बार, गोल्ड कॉइन, आभूषण आदि) खरीद रहे हैं तो पैन कार्ड की आवश्यकता होती है। तो ध्यान रहे कि आपके पास पैन कार्ड हो।

गोल्ड ईटीएफ में निवेश की प्रक्रिया

यदि आप गोल्ड ईटीएफ में निवेश कर रहे हैं तो आपको ब्रोकरेज फर्म के साथ एक अकाउंट खोलना पड़ता है तथा साथ ही साथ एक डीमैट अकाउंट भी खोलना पड़ता है। इस लेख में आगे हम आपको बताएँगे कि आपको ईटीएफ क्यों खरीदना चाहिए और गोल्ड कॉइन, गोल्ड बार और सोने के आभूषण क्यों नहीं खरीदने चाहिए।

फिज़िकल गोल्ड, गोल्ड ईटीएफ और गोल्ड बांड्स कैसे खरीदें?

फिज़िकल गोल्ड खरीदना बहुत आसान है। आपको सिर्फ इतना करना है कि जौहरी की दुकान में जाएँ और पैन कार्ड दिखाकर आभूषण खरीद लें। अब यहाँ पर एक चेतावनी है - यदि आप निवेश करना चाहते हैं तो गोल्ड के आभूषण न खरीदें बल्कि गोल्ड कॉइन खरीदें। ऐसा इसलिए क्योंकि आभूषणों में बनाने की लागत जुडी हुई होती है जो गोल्ड को पुन: बेचने पर वापस नहीं मिलती। सबसे अच्छा विकल्प है कि आप गोल्ड ईटीएफ खरीदें क्योंकि इसकी चोरी की चिंता नहीं रहती, इन्हें रखना आसान होता है और इन्हें आसानी से बेचा जा सकता है। सबसे अच्छी बात यह है कि यह गोल्ड की कीमतों का पीछा करता है।

फिजिकल गोल्ड बेचते वक्त बरतें सावधानी

फिज़िकल गोल्ड को बेचते समय जौहरी अपना मार्जिन काटता है। गोल्ड ईटीएफ खरीदने के लिए आपको एक ब्रोकिंग और ट्रेडिंग अकाउंट खोलना होगा और अपने ब्रोकर से बात करनी होगी। कई गोल्ड ईटीएफ हैं, जैसे गोल्डमैन सचस गोल्ड ईटीएफ, जो सबसे बड़ा है, कोटक गोल्ड ईटीएफ, एसबीआई गोल्ड ईटीएफ आदि। सॉवेरियन गोल्ड बांड्स भी सूची में हैं और आप उन्हें वैसे ही खरीद सकते हैं जैसे आप अन्य शेयर्स खरीदते हैं।

गोल्ड ईटीएफ और सॉवेरियन गोल्ड बांड्स क्यों खरीदें?

फिज़िकल गोल्ड चोरी हो सकता है परन्तु गोल्ड ईटीएफ और सॉवेरियन गोल्ड बांड्स नहीं। गोल्ड के आभूषणों के साथ उन्हें बनाने का शुल्क भी जुड़ा होता है और गोल्ड ईटीएफ में व्यय अनुपात होता है परन्तु सॉवेरियन गोल्ड बांड्स में ऐसा कोई शुल्क नहीं होता। सॉवेरियन बांड्स को पुन: बेचने पर कोई कर नहीं लगता जबकि फिज़िकल गोल्ड पर सूचीकरण के बाद 20 प्रतिशत टैक्स लगता है।

सॉवेरियन गोल्ड बॉन्ड्स पर कितना मिलता है इंट्रेस्ट

सॉवेरियन गोल्ड बांड्स पर आपको 2.5 प्रतिशत की दर से अर्धवार्षिक ब्याज भी मिलता है। गोल्ड ईटीएफ और फिज़िकल गोल्ड पर यह यह नहीं मिलता। जैसा कि पहले बताया गया है गोल्ड ईटीएफ के अपने फायदे होते हैं परन्तु उतने नहीं जितने बांड्स के होते हैं। अत: आपको सॉवेरियन बांड्स खरीदने चाहिए।

आपको सोना क्यों खरीदना चाहिए?

अक्सर यह प्रश्न पूछा जाता है कि, मैं सोना क्यों खरीदूं? आइये हम आपको इस प्रश्न का उत्तर बताते हैं। माना कि आपने अपना सारा पैसा शेयर्स में लगा दिया, यह सोच के कि सोने में निवेश करना लाभदायक नहीं है। हम सभी जानते हैं कि शेयर्स में कुछ भी हो सकता है। 2008 में लेहमैन ब्रदर्स के संकट के बाद तीन सालों में लगभग तीन गुनी हो गयी थी और 2008 के बाद से यह लगभग साढ़े तीन गुना वापस आ गयी हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि विश्व की अर्थव्यवस्था नष्ट हो गयी थी और निवेशकों ने सोने का आश्रय लिया। अत: विविधता के लिए आपको सोने में भी निवेश करना चाहिए। विश्लेषक मानते हैं कि सोने में लगभग 10 प्रतिशत निवेश करना चाहिए हालाँकि कई लोग इसे मृत निवेश मानते हैं।

22 कैरेट गोल्ड और 24 कैरेट गोल्ड क्या है?

यदि आप सोने में पहली बार निवेश कर रहे हैं तो आपको 22 कैरेट गोल्ड और 24 कैरेट गोल्ड में अंतर मालूम होना चाहिए। 24 कैरेट गोल्ड लगभग 100 प्रतिशत शुद्ध होता है परंतु इसे 99.9 प्रतिशत शुद्ध माना जाता है। सोने के आभूषण बनाने के लिए आप इतनी अधिक शुद्धता के सोने का उपयोग नहीं कर सकते क्योंकि सोना नाज़ुक होता है और आभूषण टूट जाता है। अत: सोने के साथ तांबा या अन्य कोई धातु मिलाई जाती है ताकि आभूषण टूटे नहीं। 22 कैरेट गोल्ड 91.6 प्रतिशत शुद्ध होता है।

18 कैरेट गोल्ड और 12 कैरेट गोल्ड

बहुत से देशों में आपको 18 कैरेट और 12 कैरेट की कम शुद्धता वाला गोल्ड भी मिलता है। यह 8 कैरेट तक नीचे जा सकता है। यदि आप आभूषण खरीद रहे हैं तो यह कम से कम 22 कैरेट की होनी चाहिए। दूसरी ओर यदि आप गोल्ड कॉइन और गोल्ड बार खरीद रहे हैं तो यह 24 कैरेट गोल्ड की होनी चहिये। तो अब यह आप पर निर्भर करता है। हमें पहले ही सलाह दी है कि यदि आप निवेश करना चाहते हैं तो आपको गोल्ड ईटीएफ और सॉवेरियन गोल्ड बांड्स खरीदने चाहिए।

भारत में हॉलमार्किंग के लिए दिशा निर्देश?

यदि आप सोने में पहली बार निवेश कर रहे हैं तो आपको भारत में हॉलमार्क निशान वाला गोल्ड ही खरीदना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि हॉलमार्क गोल्ड परखा हुआ होता है और इस पर सोने की शुद्धता की प्रमाणिकता की मुहर लगी होती है। हॉलमार्किंग का अर्थ है ब्यूरो ऑफ़ स्टैण्डर्ड सर्टिफाईड सेंटर्स जो आपको सोने की शुद्धता के लिए आश्वासन देता है। इस समय देश में बहुत कम हॉलमार्किंग सेंटर हैं। इन सेंटर्स की मांग बढ़ रही है। गोल्ड की हॉलमार्किंग करते समय हॉलमार्किंग सेंटर का लोगो (चिन्ह) और यह देखना महत्वपूर्ण होता है कि किस वर्ष में हॉलमार्किंग की गयी है। ये सभी हॉलमार्किंग सेंटर्स ब्यूरो ऑफ़ इन्डियन स्टैण्डर्ड के तहत होते हैं।

सोने के कीमतों पर प्रभाव डालने वाले कारक ?

वे लोग जो सोने में पहली बार निवेश कर रहे हैं उन्हें यह बात समझनी होगी कि भारत में सोने की कीमतें किन कारकों से प्रभावित होती है। इसमें सबसे बड़ा कारक सोने की अंतरराष्ट्रीय कीमतें हैं। यह अमेरिकी फेडरल ब्याज दरों, भौगोलिक राजनीतिक तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में सोने की बिक्री और खरीद तथा मांग पर निर्भर करता है। उदाहरण के लिए जब अमेरिकी फेडरल ब्याज की दरें बढ़ाता है तो सोने की कीमतें गिर जाती हैं और यदि ब्याज दर कम होती हैं तो सोने की कीमतें बढ़ जाती हैं। भारतीय सोने की कीमतें सोने की अंतरराष्ट्रीय कीमतों द्वारा निर्धारित की जाती हैं और वे इसे प्रभावित भी करती हैं।

डॉलर की कीमतों से भी पड़ता है सोने के दाम पर प्रभाव

सोने की कीमतों को प्रभावित करती है वह है डॉलर के मुकाबले रूपये में उतार चढ़ाव। जब डॉलर के मुकाबले रूपये की कीमत बढ़ती है तो भारत में सोने का मूल्य कम हो जाता है। दूसरी ओर जब डॉलर के मुकाबले रूपये की कीमत कम होती है तो सोना महंगा हो जाता है। यहाँ करेंसी रेट्स चेक करें। अन्य कारक जो सोने की कीमतों को प्रभावित करता है वह है स्थानीय मूल्य और सोने पर आयात कर।

गोल्ड पर टैक्स

यदि आपके गोल्ड की कीमत 30 लाख से अधिक है तो आपको प्रतिवर्ष संपत्ति कर देना पड़ता है। ध्यान रहे कि बहुत से लोगों को इस प्रावधान के बारे में पता नहीं है। गोल्ड का मूल्यांकन 31 मार्च 2017 को किया जाता है। यदि आपके पास 30 लाख से अधिक मूल्य का सोना है और उसका 1% कर आपने नहीं दिया है तो आपका सोना ज़ब्त हो सकता है।

लंबे वक्त तक लाभ देता है गोल्ड ईटीएफ

गोल्ड ईटीएफ और फिज़िकल गोल्ड सूचकांक के साथ 20 प्रतिशत का पूंजीगत लाभ देता है और यदि इसे 36 महीने बाद बेचा जाता है तो यह दीर्घकालिक पूंजीलाभ देता है। अत: गोल्ड निश्चित रूप से कर योग्य है और आपको इसके अनुसार भुगतान करना होता है। पूंजीगत अभिलाभ कर का अर्थ है कि आप लाभ लेकर सोना खरीदते और बेचते हैं।

English summary

A Beginners Guide To Investing In Gold In India

If you are looking to invest in gold in India, you have a plethora of options. First, let us see what you need to do before investing in gold,
Please Wait while comments are loading...
Company Search
Enter the first few characters of the company's name or the NSE symbol or BSE code and click 'Go'
Thousands of Goodreturn readers receive our evening newsletter.
Have you subscribed?

Find IFSC